Friday, June 12

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क्या है ‘मैकाले मानसिकता’? PM मोदी देश को इससे निकालना चाहते हैं, NEP बनेगी माध्यम

 

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बार-बार कहा है कि भारत को मैकाले की मानसिकता से बाहर निकालने की जरूरत है। इसके लिए उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को माध्यम बताया है। लेकिन आखिर क्या है ये मानसिकता और इसे किसने भारत पर थोपा?

 

कौन थे मैकाले?

थॉमसन बैबिंगटन मैकाले 1834 में भारत में गवर्नर जनरल की काउंसिल में शामिल हुए। 1835 में उन्होंने भारत में शिक्षा पर अपना ‘Macaulay’s Minute’ लिखा। इसका उद्देश्य था ऐसे भारतीय तैयार करना जो रंग से भारतीय हों, लेकिन सोच, भाषा और मूल्यों में अंग्रेज़ हों।

 

शिक्षा में बदलाव

मैकाले के सुझावों ने गुरुकुलों को बंद कर दिया और अंग्रेज़ी मीडियम स्कूलों को बढ़ावा दिया। संस्कृत और अरबी जैसी भाषाओं को महत्व नहीं मिला। उनका मानना था कि अंग्रेज़ी भाषा अधिक व्यावहारिक और उपयोगी है।

 

मैकाले मानसिकता क्या है?

यह मानसिकता भारतीय समाज में आज भी दिखाई देती है। इसके मुख्य पहलू हैं:

 

अपनी भाषा, संस्कृति और परंपरा को कम महत्व देना

पश्चिमी सोच को श्रेष्ठ मानना

अंग्रेज़ी को बुद्धिमत्ता का पैमाना समझना

भारतीय इतिहास और ज्ञान को पिछड़ा या गैर-जरूरी मानना

 

PM मोदी और NEP

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि NEP 2020 देश की नई पीढ़ी को इस मानसिकता से बाहर निकाल सकती है। शिक्षा नीति के माध्यम से मातृभाषा में शिक्षा, स्किल-बेस्ड और योग्यता आधारित पढ़ाई को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसका मकसद सिर्फ नौकरी पाने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले युवाओं का निर्माण करना है।

 

सांस्कृतिक और शैक्षिक स्वतंत्रता का संकल्प

17 नवंबर को PM मोदी ने कहा कि 2035 में मैकाले द्वारा भारत पर थोपी गई गुलामी की मानसिकता को 200 साल पूरे हो जाएंगे। उन्होंने पूरे देश से अपील की कि अगले दशक में हमें इस मानसिकता से मुक्त होने का संकल्प लेना चाहिए।

 

 

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