Saturday, January 3

कभी रोम–यूनान तक था बिहार का व्यापार, आज आर्थिक रूप से क्यों पिछड़ गया राज्य?

 

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जिस बिहार की पहचान कभी दुनिया की सबसे समृद्ध सभ्यताओं में होती थी, आज वही राज्य गरीबी, बेरोज़गारी और औद्योगिक पिछड़ेपन की पीड़ा झेल रहा है। यह सवाल केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और आर्थिक आत्ममंथन का विषय है कि जिस मगध का व्यापार रोम, यूनान और मध्य एशिया तक फैला था, वह आज देश के सबसे गरीब राज्यों में क्यों गिना जाता है?

 

विश्व शक्ति था प्राचीन बिहार

 

प्राचीन काल में बिहार, जिसे तब मगध कहा जाता था, केवल ज्ञान और दर्शन की भूमि नहीं था, बल्कि वह व्यापार, प्रशासन और सैन्य शक्ति का वैश्विक केंद्र था। मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और अशोक के काल में मगध साम्राज्य का विस्तार हिंदुकुश पर्वतमाला से लेकर दक्षिण भारत तक था।

 

यूनानी राजदूत मेगास्थनीज ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक इंडिका में पाटलिपुत्र को उस समय का सबसे समृद्ध नगर बताया है। उनके अनुसार, मगध के पास लाखों की स्थायी सेना थी, जो उसकी अपार आर्थिक शक्ति का प्रमाण थी।

 

पाटलिपुत्र: अंतरराष्ट्रीय व्यापार का केंद्र

 

गंगा, सोन और पुनपुन नदियों के संगम पर बसा पाटलिपुत्र (आज का पटना) उस दौर का एक विकसित नदी बंदरगाह था। यहां से अनाज, वस्त्र, धातु, मसाले और महीन सूती व रेशमी कपड़ों का व्यापार होता था।

रेशम मार्ग के जरिए मगध का व्यापार रोम, यूनान, मध्य एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैला हुआ था।

 

इतिहासकार मानते हैं कि ‘पट्टन’ (बंदरगाह) शब्द से ही पाटलिपुत्र नाम विकसित हुआ।

 

अंग्रेज़ी दौर में भी कायम रहा व्यापार

 

ब्रिटिश शासन के दौरान भी पटना व्यापारिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण रहा। गंगा तट पर दीघा घाट और पटना घाट जैसे बंदरगाह थे, जिन्हें रेलवे से जोड़ा गया था।

जलमार्ग और रेलमार्ग के समन्वय से पटना उत्तर भारत का एक बड़ा व्यापारिक केंद्र बना रहा।

 

आज़ादी के बाद क्यों टूटा आर्थिक ढांचा?

 

आजादी के बाद बिहार के पतन की कहानी कई परतों में छिपी है—

 

राज्य विभाजन (2000) के बाद अधिकांश खनिज, उद्योग और बिजली संसाधन झारखंड चले गए

औद्योगिक निवेश की कमी और कमजोर आधारभूत संरचना

जलमार्गीय व्यापार का पूरी तरह समाप्त हो जाना

राजनीतिक अस्थिरता और दीर्घकालिक औद्योगिक नीति का अभाव

 

परिणामस्वरूप बिहार प्रति व्यक्ति आय में देश के सबसे निचले पायदान पर पहुंच गया।

 

क्या फिर लौट सकता है बिहार का आर्थिक गौरव?

 

विशेषज्ञ मानते हैं कि बिहार के पास आज भी अपार संभावनाएं हैं—

 

उपजाऊ कृषि भूमि

विशाल श्रमशक्ति

गंगा जलमार्ग (राष्ट्रीय जलमार्ग-1)

पूर्वी भारत का रणनीतिक भौगोलिक स्थान

 

सरकार द्वारा शुरू किए गए ‘7 निश्चय-3’, औद्योगिक नीति और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास यदि ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू होते हैं, तो बिहार एक बार फिर व्यापार और उद्योग के नक्शे पर उभर सकता है।

 

इतिहास से सीख, भविष्य की तैयारी

 

बिहार का गौरव केवल अतीत की कहानी नहीं, बल्कि भविष्य की संभावना भी है। ज़रूरत है दूरदर्शी नीति, ईमानदार क्रियान्वयन और ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने की।

 

अगर मगध कभी दुनिया की आर्थिक शक्ति बन सकता था,

तो सही दिशा में प्रयास हों—तो बिहार फिर उठ खड़ा हो सकता है।

 

 

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