Sunday, January 25

‘हसीना को चूमा’ मामला: 12 साल की कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

 

This slideshow requires JavaScript.

 

नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत ने केरल के पत्रकार अरविंदन मणिकोठ को बड़ी राहत दी है, जिन्होंने अपने स्वाभिमान के लिए 12 साल लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। मामला 2013 का है, जब उन्हें तत्कालीन कन्हंगड़ नगरपालिका अध्यक्ष हसीना थजुद्दीन के खिलाफ एक व्यंग्यात्मक लेख प्रकाशित करने पर दोषी ठहराया गया था।

 

मामले की पृष्ठभूमि

 

अरविंदन मणिकोठ, जो कासरगोड स्थित सांध्य दैनिक समाचार पत्र ‘लेटेस्ट’ के प्रबंध संपादक हैं, पर भारतीय दंड संहिता की धारा 354ए(1)(iv) के तहत मामला दर्ज किया गया। यह धारा आपत्तिजनक टिप्पणियां करने को अपराध मानती है।

 

मामला उस लेख से जुड़ा था जिसका शीर्षक था ‘माकपा ने हसीना को चूमा’। इस राजनीतिक व्यंग्य लेख में तत्कालीन अध्यक्ष हसीना थजुद्दीन और स्थानीय कम्युनिस्ट पार्टी के कामकाज की आलोचना की गई थी। अभियोजकों ने इसे अश्लील और महिला के सम्मान के खिलाफ बताया।

 

निचली अदालत ने दी थी सजा

 

2019 में निचली अदालत ने मणिकोठ को दोषी पाया और कहा कि लेख में प्रयुक्त शब्दों से महिला की गरिमा को ठेस पहुंचती है। उन्हें अदालत के उठने तक कारावास की सजा और शिकायतकर्ता को ₹50,000 का मुआवजा देने का आदेश दिया गया।

 

हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका

 

केरल उच्च न्यायालय ने अगस्त 2025 में मणिकोठ की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति जी गिरीश ने कहा कि निचली और अपीलीय अदालतों ने सामग्री का सही आकलन किया था और फैसला पूरी तरह उचित था।

 

सुप्रीम कोर्ट में क्या तर्क रखा गया

 

सुप्रीम कोर्ट में मणिकोठ ने कहा कि उन्होंने न लेख लिखा और न ही किसी पर व्यक्तिगत टिप्पणी करने का इरादा था। उनका वकील यह तर्क दिया कि यह राजनीतिक व्यंग्य था और इसे अश्लीलता नहीं माना जा सकता। दोषसिद्धि ने संपादकीय उत्तरदायित्व को अपराध बना दिया और उनके संवैधानिक अधिकार, अनुच्छेद 19(1)(क) का उल्लंघन हुआ।

 

सुप्रीम कोर्ट ने दी बड़ी राहत

 

सुप्रीम कोर्ट ने दोषसिद्धि में हस्तक्षेप नहीं किया, लेकिन मणिकोठ को आत्मसमर्पण से छूट दे दी, क्योंकि उन्होंने पहले ही आर्थिक दंड का भुगतान कर दिया था। इस फैसले से पत्रकार को प्रतीकात्मक कारावास की सजा काटने की आवश्यकता नहीं रही।

 

इस निर्णय के साथ ही मणिकोठ की 12 साल लंबी स्वाभिमान की लड़ाई समाप्त हुई। उनका प्रतिनिधित्व अधिवक्ता श्रीराम परक्कट ने किया।

 

 

Leave a Reply