
नई दिल्ली: सरकार ने नए श्रम कानूनों के तहत लेबर कोड का मसौदा जारी कर दिया है और जनता से इस पर 45 दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव देने को कहा है। पुराने नियम तब तक लागू रहेंगे, जब तक नए नियम पूरी तरह प्रभावी नहीं हो जाते, बशर्ते वे नए लेबर कोड के अनुरूप हों।
सैलरी की नई परिभाषा:
अब सभी चार लेबर कोड में ‘वेतन’ की एक समान परिभाषा लागू होगी। इसमें मूल वेतन, महंगाई भत्ता और रिटेनिंग भत्ता शामिल हैं। हालांकि, भत्तों पर 50% की सीमा लगाई गई है। इसका मतलब है कि कुल कमाई का 50% से अधिक भत्ता वैधानिक गणनाओं में जोड़ा जाएगा। प्रदर्शन प्रोत्साहन जैसी चीजें वेतन का हिस्सा नहीं मानी जाएंगी।
ग्रेच्युटी की गणना:
चार लेबर कोड के मसौदे के अनुसार, ग्रेच्युटी अंतिम वेतन के आधार पर दी जाएगी। इसमें वार्षिक प्रदर्शन वेतन, चिकित्सा प्रतिपूर्ति, स्टॉक विकल्प और भोजन वाउचर शामिल नहीं होंगे। इससे कंपनियों को अपनी ग्रेच्युटी देनदारी का बेहतर अनुमान लगाने में मदद मिलेगी।
ओवरटाइम और काम करने की शर्तें:
सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम करने पर दोगुना वेतन मिलेगा।
लगातार 10 कार्य दिवस से अधिक काम नहीं होना चाहिए।
श्रमिकों को आराम के दिन मिलने अनिवार्य होंगे।
अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान:
40 वर्ष से अधिक आयु के कर्मचारियों के लिए वार्षिक चिकित्सा जांच अनिवार्य।
क्रेच सुविधाएं न होने पर प्रति बच्चा कम से कम ₹500 क्रेच भत्ता।
अंतर-राज्यीय प्रवासी श्रमिकों के लिए यात्रा भत्ता का प्रावधान।
सरकार ने इसके साथ ही FAQs की सूची भी जारी की है, जिसमें नए लेबर कोड से जुड़े सभी सवालों के जवाब शामिल हैं। इसका उद्देश्य कर्मचारियों के कल्याण और उत्पादकता के बीच संतुलन बनाना है।
निष्कर्ष:
नए नियमों से अब PF योगदान, वेतन संरचना, ग्रेच्युटी और ओवरटाइम जैसी चीजें स्पष्ट होंगी, जिससे कर्मचारियों और नियोक्ताओं दोनों के लिए भ्रम दूर होगा।