Monday, June 22

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ईरान को एक और मौका मिले… सऊदी अरब, कतर और ओमान की अमेरिका से अपील, क्या ट्रंप मानेंगे?
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ईरान को एक और मौका मिले… सऊदी अरब, कतर और ओमान की अमेरिका से अपील, क्या ट्रंप मानेंगे?

वॉशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए खाड़ी देशों ने आख़िरी कोशिशें तेज कर दी हैं। सऊदी अरब, कतर और ओमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अपील की है कि वे ईरान पर संभावित सैन्य हमले से फिलहाल पीछे हटें और कूटनीति को एक और मौका दें। इन देशों को आशंका है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो पूरा मध्य पूर्व अस्थिर हो सकता है और क्षेत्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा। खाड़ी देशों की ‘आख़िरी समय की कूटनीति’ एक वरिष्ठ सऊदी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि तीनों देशों ने राष्ट्रपति ट्रंप को समझाने के लिए लंबी और जोरदार राजनयिक पहल की है। उनका कहना है कि ईरान को “अच्छे इरादे दिखाने” का एक मौका दिया जाना चाहिए। अधिकारी के मुताबिक, मौजूदा सकारात्मक माहौल और आपसी भरोसे को मजबूत करने के लिए बातचीत अभी भी जारी है। हमले से पूरे क्षेत्र में उथल-पुथल का ...
अमेरिकी सैनिक कतर लौटे, ईरान ने खोला एयरस्पेस, क्या ट्रंप ने हमले के इरादे छोड़े?
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अमेरिकी सैनिक कतर लौटे, ईरान ने खोला एयरस्पेस, क्या ट्रंप ने हमले के इरादे छोड़े?

तेहरान/दोहा। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव में कमी के संकेत मिलने लगे हैं। अमेरिकी सैनिकों ने कतर के अल उदीद एयरबेस से हटने के दो दिन बाद वापस बेस पर लौटना शुरू कर दिया है। अमेरिकी सैन्य विमान लगातार अल उदीद में उतर रहे हैं और सुरक्षा चेतावनी का स्तर भी कम कर दिया गया है। पहले यह एयरबेस ईरान के संभावित हमले के खतरे के चलते हाई अलर्ट पर रखा गया था। सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से यह संकेत मिलता है कि फिलहाल वॉशिंगटन की ईरान पर सीधी सैन्य कार्रवाई की योजना नहीं है। अमेरिका ने बुधवार को जिन सैनिकों को बेस छोड़ने की सलाह दी थी, उन्हें वापस लौटने की अनुमति दे दी है। ईरान ने भी एयरस्पेस खोला ईरान ने अपने हवाई क्षेत्र को करीब पाँच घंटे बंद करने के बाद रात 10 बजे फिर से खोल दिया। इससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और ईरानी एयरलाइंस की सेवाओं को पुनः संचालन की अनुमति मिली। इससे पहले एयरस्प...
अमेरिका–ईरान युद्ध की आहट? जानिए ट्रंप की चेतावनियों के बीच ईरान पर किन घातक हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है अमेरिका
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अमेरिका–ईरान युद्ध की आहट? जानिए ट्रंप की चेतावनियों के बीच ईरान पर किन घातक हथियारों का इस्तेमाल कर सकता है अमेरिका

वॉशिंगटन। ईरान में जारी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों और उन पर हो रही कथित हिंसक कार्रवाई को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार तेहरान को चेतावनी दे रहे हैं कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दमन जारी रहा तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप से पीछे नहीं हटेगा। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर टिकी है कि यदि हालात युद्ध की ओर बढ़ते हैं, तो अमेरिका ईरान के खिलाफ किन घातक हथियारों और सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल कर सकता है। मध्य पूर्व में अमेरिका की रणनीतिक मौजूदगी ईरान के आसपास अमेरिका की सैन्य मौजूदगी सीमित जरूर है, लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद मजबूत मानी जाती है। अमेरिका के पास मध्य पूर्व में कुल 19 सैन्य ठिकाने हैं। बहरीन, कतर, कुवैत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, इराक और मिस्र में स्थित ये ठिकाने ईरान पर नजर रखने और त्वरित कार्रव...
USS अब्राहम लिंकन मिडिल ईस्ट की ओर: अमेरिका का परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर कितना शक्तिशाली, INS विक्रांत से कैसे तुलना करता है?
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USS अब्राहम लिंकन मिडिल ईस्ट की ओर: अमेरिका का परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर कितना शक्तिशाली, INS विक्रांत से कैसे तुलना करता है?

    तेल अवीव/वॉशिंगटन: अमेरिकी नौसेना का परमाणु ऊर्जा संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन मिडिल ईस्ट की ओर रवाना हो गया है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इसका उद्देश्य क्षेत्र में तैनाती और संभावित तनाव प्रबंधन है, हालांकि किसी सीधे हमले की पुष्टि नहीं हुई है। यह एयरक्राफ्ट कैरियर हाल ही में दक्षिण चीन सागर में फायर ड्रिल के दौरान देखा गया था और अब इसे ईरान और आसपास के पानी में पहुँचने में कम से कम एक हफ्ता लगेगा।   दुनिया का चलता-फिरता किला: USS अब्राहम लिंकन, निमित्ज क्लास का हिस्सा, अमेरिका के सबसे ताकतवर और विनाशक एयरक्राफ्ट कैरियर्स में से एक है। इसका एयर विंग F/A-18 सुपर हॉर्नेट, F-35 स्टील्थ फाइटर, EA-18G ग्राउलर, E-2D हॉकआई और MH-60 सीहॉक हेलीकॉप्टर से लैस है। यह जहाज जमीन, समुद्र और आकाश में हर तरह की युद्ध क्षमता रखता है। इसका विस्थापन 1 लाख टन से अधिक...
अफ्रीका में चीन-तुर्की के प्रभुत्व को चुनौती दे सकता है भारत, इजरायल ने मांगा दिल्ली का सहयोग
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अफ्रीका में चीन-तुर्की के प्रभुत्व को चुनौती दे सकता है भारत, इजरायल ने मांगा दिल्ली का सहयोग

  तेल अवीव / नई दिल्ली: हॉर्न ऑफ अफ्रीका में सोमालीलैंड को हाल ही में इजरायल ने मान्यता दी है। इसे तेल अवीव का एक बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है। इजरायल के एक्सपर्ट का मानना है कि इस क्षेत्र में चीन और तुर्की के बढ़ते प्रभाव को काउंटर करने में भारत की भूमिका निर्णायक हो सकती है।   डॉ. लॉरेन डागन एमोस, जो बेगिन-सादत सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक स्टडीज (BESA) में फेलो और बार-इलान यूनिवर्सिटी में लेक्चरर हैं, ने जेरूशलम पोस्ट में अपने ओपिनियन लेख में कहा कि भारत की मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता और इजरायल की उन्नत साइबर व सुरक्षा तकनीक का संयोजन इस क्षेत्र में रणनीतिक बदलाव ला सकता है।   उन्होंने लिखा है कि सोमालीलैंड एक “अनौपचारिक प्रयोगशाला” के रूप में उभर रहा है, जो समुद्री शासन और सुरक्षा व्यवस्था के नए मॉडल को परखने का मौका देता है। इस साझेदारी के माध्यम से भारत और इजरायल चीन...
175 अरब डॉलर के ‘गोल्डन डोम’ के लिए ग्रीनलैंड जरूरी  ट्रंप का खुलासा: रूसी मिसाइलों से अमेरिका को बचाने की तैयारी
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175 अरब डॉलर के ‘गोल्डन डोम’ के लिए ग्रीनलैंड जरूरी ट्रंप का खुलासा: रूसी मिसाइलों से अमेरिका को बचाने की तैयारी

  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर अपने आक्रामक रुख के पीछे की असली वजह पहली बार सार्वजनिक रूप से साफ कर दी है। ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रस्तावित ‘गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम’ के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण बेहद जरूरी है। यह गोल्डन डोम परियोजना करीब 175 अरब डॉलर की बताई जा रही है।   ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “ग्रीनलैंड अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह उस गोल्डन डोम के लिए जरूरी है, जिसे हम बना रहे हैं।”   ग्रीनलैंड से कम कुछ भी मंजूर नहीं   राष्ट्रपति ट्रंप ने यहां तक कहा कि ग्रीनलैंड से कम कुछ भी उन्हें मंजूर नहीं है। उनका दावा है कि अगर ग्रीनलैंड पर अमेरिका का नियंत्रण होता है तो नाटो पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और प्रभावी बन जाएगा। उन्होंने यह संक...
भारत पर ‘जीत’ के बाद JF-17 बेचने के दावे, शहबाज का बयान  ब्रह्मोस हमले और एयरबेस नुकसान के बावजूद पाकिस्तान का दावा
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भारत पर ‘जीत’ के बाद JF-17 बेचने के दावे, शहबाज का बयान ब्रह्मोस हमले और एयरबेस नुकसान के बावजूद पाकिस्तान का दावा

    पाकिस्तान, जो 1971 की जंग में आधा मुल्क खो चुका था, अब भी अपनी सैन्य उपलब्धियों को लेकर ‘विजेता’ होने का दावा करता है। हाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि “पिछले साल की सैन्य सफलताओं के बाद पाकिस्तान का रक्षा उत्पादन और मजबूती से बढ़ा है।”   पाकिस्तानी मीडिया और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान सऊदी अरब, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, सूडान और लीबिया जैसे देशों को JF-17 लड़ाकू विमान बेच रहा है। हालांकि, इन देशों में लीबिया के अलावा किसी ने भी पाकिस्तान के दावों की पुष्टि नहीं की है।   शहबाज का बयान और सैन्य उपलब्धियां   शहबाज शरीफ ने बताया कि पाकिस्तान एयर फोर्स ने तैमूर सिस्टम का सफलतापूर्वक लॉन्च किया, जबकि पाकिस्तान नेवी ने LY-80 सिस्टम का परीक्षण किया। उन्होंने कहा कि इन सफलताओं से पाकिस्तान की रक्षा क्ष...
अमेरिका ने ईरान की ओर भेजा परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन  F-35 जेट और मिसाइलों के साथ बढ़ा खतरा, मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा
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अमेरिका ने ईरान की ओर भेजा परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन F-35 जेट और मिसाइलों के साथ बढ़ा खतरा, मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ा

    अमेरिका ने मिडिल ईस्ट की तरफ एयरक्राफ्ट कैरियर अब्राहम लिंकन स्ट्राइक ग्रुप (ABECSG) भेजा है, जिसमें लगभग 90 लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर शामिल हैं। इसमें आधुनिक F-35C लाइटनिंग II और F/A-18E/F सुपर हॉर्नेट जैसे विमानों के साथ-साथ आर्ले बर्क-क्लास गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर तैनात हैं। अमेरिकी नौसेना के अनुसार, इस कैरियर में टॉमहॉक मिसाइलें भी हैं, जिनकी मारक क्षमता 1,600 से 2,500 किलोमीटर के बीच है, जिससे यह ईरान की सीमा में घुसे बिना देश के कई हिस्सों में हमला कर सकता है।   रिपोर्ट के मुताबिक, अब्राहम लिंकन स्ट्राइक ग्रुप परमाणु ऊर्जा से संचालित सबसे शक्तिशाली समुद्री यूनिट है और इसे चलता-फिरता युद्धक मैदान माना जाता है। जनवरी के पहले हफ्ते तक यह कैरियर दक्षिण चीन सागर और फिलीपीन सागर में ऑपरेट कर रहा था, लेकिन पेंटागन ने इसे बढ़ते ईरान तनाव के बीच मध्य पूर्व की तरफ बढ़न...
तुर्की से ड्रोन और हमलावर हेलीकॉप्टर खरीदेगा बांग्लादेश  एर्दोगन की ‘इस्लामिक कूटनीति’ से भारत के चारों ओर बन रहा नया सुरक्षा घेरा?
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तुर्की से ड्रोन और हमलावर हेलीकॉप्टर खरीदेगा बांग्लादेश एर्दोगन की ‘इस्लामिक कूटनीति’ से भारत के चारों ओर बन रहा नया सुरक्षा घेरा?

  तुर्की और बांग्लादेश के बीच रक्षा सहयोग तेज़ी से गहराता जा रहा है। ताज़ा रिपोर्टों के मुताबिक, बांग्लादेश वायुसेना तुर्की से ANKA सीरीज के ड्रोन और T129 ATAK हमलावर हेलीकॉप्टर खरीदने की दिशा में गंभीर बातचीत कर रही है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब तुर्की राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन इस्लामिक देशों के साथ सैन्य और रणनीतिक संबंधों को मजबूती से आगे बढ़ा रहे हैं।   सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश एयर चीफ मार्शल हसन महमूद खान से ढाका में तुर्की एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (TAI) के शीर्ष अधिकारियों ने मुलाकात की। इस बैठक में ड्रोन और हमलावर हेलीकॉप्टर सौदे से जुड़े तकनीकी और रणनीतिक पहलुओं पर चर्चा हुई। माना जा रहा है कि बांग्लादेश आठ T129 ATAK हेलीकॉप्टर खरीद सकता है।   पाकिस्तान के बाद अब बांग्लादेश   गौरतलब है कि तुर्की पहले ही पाकिस्तान को ड्रोन और सैन्य सहायता...
सऊदी अरब के सबसे उम्रदराज शख्स का निधन, 110 साल में किया निकाह, 40 बार हज और 142 साल की ऐतिहासिक उम्र
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सऊदी अरब के सबसे उम्रदराज शख्स का निधन, 110 साल में किया निकाह, 40 बार हज और 142 साल की ऐतिहासिक उम्र

  सऊदी अरब के सबसे उम्रदराज व्यक्ति माने जाने वाले शेख नासर बिन रद्दान अल राशिद अल वदाई का निधन हो गया है। उन्होंने राजधानी रियाद में 142 वर्ष की आयु में प्राकृतिक कारणों से अंतिम सांस ली। उनका जीवन न सिर्फ असाधारण लंबी उम्र का प्रतीक था, बल्कि आधुनिक सऊदी अरब के इतिहास का चलता-फिरता दस्तावेज भी माना जाता है।   शेख नासर ने अपनी आंखों से सऊदी अरब को एक गरीब रेगिस्तानी देश से वैश्विक तेल महाशक्ति बनते देखा। उन्होंने देश के संस्थापक किंग अब्दुलअज़ीज़ बिन अब्दुल रहमान अल सऊद के शासनकाल से लेकर मौजूदा शासक किंग सलमान बिन अब्दुलअज़ीज़ तक का दौर देखा।   110 साल की उम्र में शादी, पिता बनकर दुनिया को चौंकाया   शेख नासर उस समय दुनिया भर में चर्चा में आ गए थे, जब उन्होंने 110 साल की उम्र में निकाह किया और बाद में पिता बने। इस विवाह से उन्हें एक बेटी हुई, जिसने चिकित्सा और ज...