
वॉशिंगटन।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए खाड़ी देशों ने आख़िरी कोशिशें तेज कर दी हैं। सऊदी अरब, कतर और ओमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अपील की है कि वे ईरान पर संभावित सैन्य हमले से फिलहाल पीछे हटें और कूटनीति को एक और मौका दें। इन देशों को आशंका है कि अगर अमेरिका ने ईरान पर हमला किया तो पूरा मध्य पूर्व अस्थिर हो सकता है और क्षेत्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो जाएगा।
खाड़ी देशों की ‘आख़िरी समय की कूटनीति’
एक वरिष्ठ सऊदी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि तीनों देशों ने राष्ट्रपति ट्रंप को समझाने के लिए लंबी और जोरदार राजनयिक पहल की है। उनका कहना है कि ईरान को “अच्छे इरादे दिखाने” का एक मौका दिया जाना चाहिए।
अधिकारी के मुताबिक, मौजूदा सकारात्मक माहौल और आपसी भरोसे को मजबूत करने के लिए बातचीत अभी भी जारी है।
हमले से पूरे क्षेत्र में उथल-पुथल का डर
खाड़ी देशों को डर है कि ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से न सिर्फ खाड़ी क्षेत्र बल्कि इराक, सीरिया, लेबनान और यमन तक हालात बिगड़ सकते हैं। तेल आपूर्ति, समुद्री मार्गों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है।
ईरान की तीखी प्रतिक्रिया और चेतावनी
इस बीच ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाया है। ईरानी सरकारी मीडिया पर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को लेकर एक विवादित तस्वीर दिखाई गई, जिसमें उन्हें जान से मारने की धमकी जैसा संदेश जोड़ा गया। यह प्रसारण ट्रंप की लगातार दी जा रही चेतावनियों के बाद सामने आया, जिससे तनाव और बढ़ गया है।
ट्रंप की दो टूक चेतावनी
हालांकि राष्ट्रपति ट्रंप अपने रुख पर सख्त दिख रहे हैं। डेट्रॉइट इकोनॉमिक क्लब में दिए भाषण में उन्होंने कहा कि जब तक ईरान में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा बंद नहीं होती, तब तक ईरानी अधिकारियों के साथ सभी बैठकें रद्द रहेंगी।
ट्रंप ने ईरानी जनता से प्रदर्शन जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि दोषियों को “भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।”
अब फैसला वॉशिंगटन के हाथ
एक ओर खाड़ी देश शांति और संवाद की पैरवी कर रहे हैं, तो दूसरी ओर ट्रंप प्रशासन का सख्त रुख बना हुआ है। ऐसे में सवाल यही है कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप सहयोगी देशों की अपील मानकर ईरान को एक और मौका देंगे, या मध्य पूर्व एक और बड़े संघर्ष की ओर बढ़ेगा।