
वॉशिंगटन।
ईरान में जारी सरकार-विरोधी प्रदर्शनों और उन पर हो रही कथित हिंसक कार्रवाई को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार तेहरान को चेतावनी दे रहे हैं कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दमन जारी रहा तो अमेरिका सैन्य हस्तक्षेप से पीछे नहीं हटेगा। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस बात पर टिकी है कि यदि हालात युद्ध की ओर बढ़ते हैं, तो अमेरिका ईरान के खिलाफ किन घातक हथियारों और सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल कर सकता है।
मध्य पूर्व में अमेरिका की रणनीतिक मौजूदगी
ईरान के आसपास अमेरिका की सैन्य मौजूदगी सीमित जरूर है, लेकिन रणनीतिक रूप से बेहद मजबूत मानी जाती है। अमेरिका के पास मध्य पूर्व में कुल 19 सैन्य ठिकाने हैं। बहरीन, कतर, कुवैत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, जॉर्डन, इराक और मिस्र में स्थित ये ठिकाने ईरान पर नजर रखने और त्वरित कार्रवाई के लिए अहम भूमिका निभाते हैं।
इनमें सबसे महत्वपूर्ण कतर का अल उदीद एयरबेस है, जो क्षेत्र में अमेरिका का सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है। यहां करीब 10 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात हैं और यह बेस लंबी दूरी के हवाई अभियानों के लिए जाना जाता है।
जमीनी युद्ध से बचकर ‘दूर से हमला’ कर सकता है अमेरिका
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सीधे जमीनी युद्ध में उतरने के बजाय स्टैंडऑफ अटैक यानी दूर से हमला करने की रणनीति अपनाएगा, ताकि अमेरिकी सैनिकों को न्यूनतम नुकसान हो।
टॉमहॉक क्रूज मिसाइल: सबसे बड़ा खतरा
अमेरिका के पास ईरान के खिलाफ इस्तेमाल के लिए टॉमहॉक क्रूज मिसाइल एक प्रमुख विकल्प है। यह मिसाइल अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों और परमाणु पनडुब्बियों से दागी जा सकती है।
ईरानी तट से सैकड़ों किलोमीटर दूर रहकर भी यह मिसाइल सटीक निशाना साधने में सक्षम है, जिससे अमेरिकी सैनिकों को सीधा खतरा नहीं होता।
JASSM मिसाइल से गहरे ठिकानों पर हमला
दूसरा बड़ा हथियार है जॉइंट एयर-टू-सरफेस स्टैंडऑफ मिसाइल (JASSM)। इसमें करीब 1,000 पाउंड का बंकर-भेदी वॉरहेड होता है और इसकी मारक क्षमता लगभग 1,000 किलोमीटर तक है।
इसे F-15, F-16, F-35 जैसे फाइटर जेट्स और B-1, B-2, B-52 बॉम्बर्स से दागा जा सकता है। यह ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों के लिए गंभीर खतरा मानी जाती है।
ड्रोन हमलों की भी आशंका
अमेरिका ईरान पर ड्रोन हमलों का सहारा भी ले सकता है। ड्रोन न केवल सटीक हमले करते हैं, बल्कि निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। इससे अमेरिकी पायलटों की जान को खतरा कम होता है।
साइबर युद्ध: बिना गोली चलाए बड़ा हमला
सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ अमेरिका साइबर हमले का विकल्प भी अपना सकता है। इसके तहत ईरान के
- एयर डिफेंस सिस्टम
- ड्रोन कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क
- संचार और बिजली व्यवस्था
को निशाना बनाया जा सकता है। इसके अलावा अमेरिका ईरानी प्रदर्शनकारियों के लिए इंटरनेट सेवाएं बहाल करने में भी मदद कर सकता है, जिससे तेहरान सरकार पर दबाव और बढ़ेगा।
निष्कर्ष
फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच सीधा युद्ध नहीं हुआ है, लेकिन ट्रंप की सख्त चेतावनियों और बढ़ती सैन्य तैयारियों ने हालात को बेहद संवेदनशील बना दिया है। यदि तनाव और बढ़ता है, तो दुनिया एक बार फिर मध्य पूर्व में बड़े संघर्ष की आशंका से इनकार नहीं कर सकती।