
जयपुर: राजस्थान की सियासत में महाराजा और महारानी कॉलेज की बेशकीमती जमीन को लेकर अचानक हड़कंप मच गया। मामला तब और गरमाया जब भाजपा के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मंत्री कालीचरण सराफ ने विधानसभा में अपनी ही सरकार को घेरते हुए इसे ‘अवैध’ करार दिया। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह ऐतिहासिक जमीन नीलामी और व्यावसायिक उपयोग की भेंट चढ़ सकती है।
बीजेपी विधायक ने अपनी ही सरकार को घेरा
सराफ ने सदन में कहा कि महाराजा कॉलेज की 48 बीघा और महारानी कॉलेज की लगभग 30 बीघा जमीन का नामांतरण जेडीए के नाम करना पूरी तरह अवैध है। उन्होंने अधिकारियों पर सवाल उठाए और कहा कि यह कार्रवाई विश्वविद्यालय के सिंडिकेट की अनुमति के बिना की गई, जो नियमों के खिलाफ है।
विपक्ष और अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
सराफ की आवाज को देखकर कांग्रेस के मनीष यादव और आरएलडी के सुभाष गर्ग ने भी समर्थन किया। गर्ग ने इसे प्रशासनिक धब्बा बताते हुए कहा कि कुछ अधिकारियों ने मिलकर यह खेल अंजाम दिया, जो बेहद शर्मनाक है।
शिक्षा की स्वायत्तता पर खतरा
यूनिवर्सिटी पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रो. सोमदेव ने कहा कि विश्वविद्यालय की अनुमति के बिना जमीन का कोई भी ट्रांसफर नहीं हो सकता। इसके बावजूद अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से मालिकाना हक बदल दिया। इसके चलते डर है कि जेडीए भविष्य में इस जमीन को नीलाम कर सकता है या व्यावसायिक उपयोग के लिए इस्तेमाल कर सकता है।
जेएलएन मार्ग पर नए प्रोजेक्ट से कॉलेज की पहचान खतरे में
सूत्रों के अनुसार, जेएलएन मार्ग पर बन रहे आईपीडी टावर के लिए महाराजा कॉलेज के खेल मैदान के नीचे अंडरग्राउंड पार्किंग बनाई जा रही है। इसके लिए 50 फीट चौड़े आरोग्य पथ को 100 फीट तक बढ़ाने का प्लान है, जो सीधे तौर पर कॉलेज की पहचान और विरासत को मिटा सकता है।
सदन में गूंजी ‘धोखे’ की आवाज
कांग्रेस विधायक मनीष यादव ने मांग की कि यह नामांतरण तत्काल निरस्त किया जाए। उन्होंने इसे राजस्थान की शैक्षणिक विरासत पर हमला बताया। शिक्षाविदों और छात्रों में भी भारी रोष है कि जिस जमीन पर छात्रों और खिलाड़ियों का हक था, उसे कागजी बाज़ीगरी के जरिए सरकारी विभागों के नाम कर दिया गया।
