Thursday, February 19

तमिलनाडु चुनाव: स्टारडम बनाम मुफ्त राजनीति, विजय की चुनौती

चेन्नई: तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में त्रिकोणीय मुकाबले की संभावना है। एक ओर AIADMK के नेतृत्व वाली एनडीए और दूसरी ओर DMK की अगुवाई वाला सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस है। इसी बीच सुपरस्टार एक्टर विजय ने अपनी नई पार्टी टीवीके के माध्यम से चुनावी मैदान में कदम रखा है। उनके लिए चुनौती बड़ी है: मुफ्त की राजनीति में महारथ हासिल करने वाली DMK और AIADMK को मात देना।

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जब विजय अपने पीले झंडे और सीटी चुनाव चिन्ह के साथ रैलियों में आते हैं, तो युवा और महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। जनता का उत्साह यह दर्शाता है कि एमजीआर और जयललिता के बाद तमिलनाडु में स्टार राजनेता का नया करिश्मा उभर सकता है। लेकिन इस चुनाव में विजय को DMK और AIADMK की नकद और मुफ्त योजनाओं से भी निपटना होगा।

DMK ने पहले ही खोल दिया खजाना

चुनाव से पहले DMK सरकार ने महिलाओं और छात्रों के लिए भारी योजनाओं की घोषणा कर दी है। जनवरी में 2.22 करोड़ राशन कार्ड होल्डर्स को 3,000 रुपये और पोंगल गिफ्ट बास्केट दिए गए। सरकारी कॉलेजों के 20 लाख छात्रों को लैपटॉप देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इसके अलावा 1.31 करोड़ महिला लाभार्थियों को 5,000 रुपये जमा किए गए। मुख्यमंत्री स्टालिन ने वादा किया कि सत्ता में आने पर महिलाओं को मिलने वाली राशि 2,000 रुपये प्रति माह होगी।

AIADMK भी पीछे नहीं

AIADMK ने भी चुनावी वादों में मुफ्त और नकद को शामिल किया है। उन्होंने युवाओं को लैपटॉप और महिलाओं को 2,000 रुपये देने का वादा किया है। विजय ने भी महिलाओं को 2,000 रुपये हर महीने देने की बात कही है, लेकिन अन्य मुफ्त योजनाओं का खुलासा अभी तक नहीं किया।

मुफ्त की राजनीति का असर

तमिलनाडु में मुफ्त की राजनीति नई नहीं है। DMK और AIADMK हमेशा से इस खेल में खिलाड़ी रहे हैं। 2006 में करुणानिधि ने मुफ्त रंगीन टीवी और चावल के वादे से सत्ता हासिल की थी। 2011 में जयललिता ने मिक्सी, लैपटॉप, स्कूल यूनिफॉर्म, फ्री चावल और टीवी केबल जैसी योजनाओं से AIADMK को भारी जीत दिलाई। इसके बाद 2016 और 2021 में भी DMK और AIADMK ने मुफ्त योजनाओं को चुनाव जीतने का हथियार बनाया।

विजय की चुनौती

अब 2026 के विधानसभा चुनाव में एक्टर विजय का सामना DMK और AIADMK के मुफ्त की राजनीति के चक्रव्यूह से है। अगर विजय सफल होते हैं और स्टारडम के दम पर मुफ्त वादों के चक्रव्यूह को तोड़ पाते हैं, तो यह तमिलनाडु और देश की राजनीति में नई दिशा की शुरुआत होगी।

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