
मोतिहारी/भिवाड़ी: राजस्थान के भिवाड़ी में एक अवैध फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट ने बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के सात परिवारों की खुशियां छीन लीं। इस हादसे में जिले के सात मजदूरों की जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गई। घटनास्थल पर मातम का आलम है, परिजन अब भी अपने बच्चों की राह देख रहे हैं।
पिता का दर्दनाक इंतजार
झरोखर कस्बे के सिकंदर पासवान का 17 वर्षीय बेटा मिंटू उसी फैक्ट्री में काम करता था। धमाके की सूचना मिलते ही सिकंदर फैक्ट्री की ओर दौड़े, लेकिन आग और धुएं के बीच उन्हें अपने बेटे का कोई पता नहीं चल सका। वह हर आने-जाने वाले से बस यही पूछते रहे: “मेरा बेटा यहीं था, क्या किसी ने उसे देखा?” देर शाम तक जब मिंटू का नाम मृतकों में शामिल होने की पुष्टि हुई, तब भी पिता में यह उम्मीद बनी रही कि उनका लाल सुरक्षित वापस आएगा।
मृतकों की पहचान और कहानी
हादसे में मृतकों की पहचान इस प्रकार हुई: सुजांत पासवान, मिंटू पासवान, अजीत, रवि, श्याम, अमरेश और शशि भूषण। ये सभी मजदूर करीब डेढ़ महीने पहले बेहतर भविष्य की तलाश में मोतिहारी से भिवाड़ी आए थे। हादसे से एक दिन पहले 15 फरवरी को उनके परिवारों ने शिवरात्रि मनाई थी। अगले दिन सुबह ही मजदूर काम पर निकले और कुछ ही घंटों बाद उनकी मौत की खबर घर पहुंच गई।
फैक्ट्री की लापरवाही
मृतक मिंटू के भाई राजकुमार द्वारा दर्ज कराई गई FIR में फैक्ट्री प्रबंधन की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। आरोप है कि फैक्ट्री मालिक राजेंद्र कुमार, हेमंत कुमार शर्मा, सुपरवाइजर अभिनंदन तिवारी और ठेकेदार अजीत को यह भली-भांति पता था कि बिना सुरक्षा उपकरणों के विस्फोटक का काम जानलेवा हो सकता है। इसके बावजूद मुनाफे के लिए मजदूरों को जोखिम में डाला गया।
आरोपियों पर FIR
पुलिस ने फैक्ट्री मालिक राजेंद्र कुमार (गाजियाबाद), उनके पार्टनर हेमंत कुमार शर्मा (शाहजहांपुर, राजस्थान), सुपरवाइजर अभिनंदन तिवारी (मोतिहारी, बिहार) और ठेकेदार अजीत (खेरथल-तिजारा, राजस्थान) के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।
इस हादसे ने मोतिहारी के सात घरों में मातम फैला दिया है और परिजन अब भी अपने प्रियजनों के खोने का दर्द सह रहे हैं।
