
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए गए इंटरव्यू को लेकर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस ने इस इंटरव्यू को ‘बहुत सोच-समझकर लिखा गया और हताशा में किया गया पीआर अभ्यास’ बताते हुए आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य देश के अहम मुद्दों से जनता का ध्यान हटाना है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया कि प्रधानमंत्री यह इंटरव्यू देकर बजट की आलोचना और संसद में विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
‘बजट पर नकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद इंटरव्यू की जरूरत पड़ी’
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जानते हैं कि इस वर्ष पेश किया गया केंद्रीय बजट निराशाजनक रहा है और उसमें “दिमागी थकान के संकेत” दिखाई देते हैं। उन्होंने दावा किया कि बजट पर बाजार ने नकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और निवेशक भी इससे प्रभावित नहीं हुए। इसी कारण बजट पेश होने के करीब दो सप्ताह बाद प्रधानमंत्री को इंटरव्यू देने की आवश्यकता महसूस हुई।
‘मोदी-स्टाइल वन लाइनर्स का कोई अर्थ नहीं’
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के इंटरव्यू में हमेशा की तरह “मोदी-स्टाइल वन लाइनर्स” हैं, जिनका वास्तविक अर्थ और समाधान से कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि इंटरव्यू के माध्यम से सरकार एक बार फिर राजनीतिक नैरेटिव बदलने की कोशिश कर रही है।
‘प्रधानमंत्री झुके भी हैं और थके भी हैं’
कांग्रेस ने अमेरिका के साथ ट्रेड डील और किसानों से जुड़े मुद्दों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री पर दबाव होने का दावा किया। जयराम रमेश ने कहा कि अमेरिका के सामने ट्रेड डील में “सरेंडर” करने के कारण प्रधानमंत्री आलोचनाओं से घिरे हैं, इसलिए वे मीडिया आउटरीच के जरिए हेडलाइन मैनेजमेंट की रणनीति अपना रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री लाखों किसानों के साथ किए गए “धोखे” और अन्य मुद्दों से ध्यान हटाने का प्रयास कर रहे हैं।
जयराम रमेश ने टिप्पणी करते हुए कहा—
“प्रधानमंत्री झुके भी हैं और थके भी हैं।”
पीएम मोदी ने इंटरव्यू में क्या कहा
अपने इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत के आर्थिक परिवर्तन के अगले चरण में निजी क्षेत्र (Private Sector) की भूमिका बेहद अहम होगी। उन्होंने कहा कि सुधार (Reforms) उनकी सरकार की मुख्य प्रतिबद्धता रही है और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए उद्योग जगत को नवाचार, दीर्घकालिक क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बड़े निवेश करने होंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नवीनतम केंद्रीय बजट किसी मजबूरी का परिणाम नहीं था, बल्कि यह सरकार की तैयारी और प्रेरणा का संकेत है। उन्होंने कहा कि यह बजट भारत के विकसित राष्ट्र बनने की आकांक्षा को दर्शाता है और उनकी सरकार ने कभी भी बजट को केवल एक “रूटीन बहीखाता दस्तावेज” के रूप में नहीं देखा।
