
मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गुरुवार को शेड्यूल्ड कमर्शियल बैंकों और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए लोन रिकवरी के नए ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। नए नियमों के अनुसार अब रिकवरी एजेंट ग्राहकों को डरा-धमका नहीं पाएंगे और बैंक सीधे तौर पर उनके व्यवहार के लिए जिम्मेदार होंगे।
कॉल रिकॉर्डिंग और सभ्य व्यवहार अनिवार्य
नए नियमों के तहत रिकवरी एजेंटों को ग्राहकों से सलीके से और सभ्य तरीके से बात करनी होगी। हर कॉल की रिकॉर्डिंग अनिवार्य होगी ताकि विवाद की स्थिति में सबूत मौजूद हों। एजेंट शाम 7 बजे के बाद कॉल नहीं करेंगे और किसी भी विवाद या शिकायत की स्थिति में बैंक सीधे तौर पर जिम्मेदारी लेगा।
खास मौकों पर रोक
आरबीआई ने साफ किया है कि गमी, शादी, त्योहार या मौत जैसे खास मौकों पर लोन रिकवरी नहीं की जाएगी। अगर लोन का मामला कोर्ट में चल रहा हो, तो बैंक को एजेंट चुनते समय विशेष सावधानी बरतनी होगी।
ट्रेनिंग और बैकग्राउंड चेक जरूरी
अब रिकवरी एजेंटों को IIBF से प्रोफेशनल ट्रेनिंग लेना अनिवार्य होगा। साथ ही, बैंक एजेंटों को काम पर रखने से पहले उनका पिछला रिकॉर्ड और भरोसेमंदता जांचेंगे। यह जांच समय-समय पर दोबारा भी की जाएगी।
डेटा की सुरक्षा पर जोर
नए नियमों के तहत ग्राहकों का निजी डेटा किसी भी हाल में लीक या गलत इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। बैंक एजेंसियों और कर्मचारियों के डेटा हैंडलिंग पर कड़ी निगरानी रखेंगे।
RBI का मकसद
आरबीआई का उद्देश्य है कि लोन रिकवरी के नाम पर ग्राहकों को डराना या परेशान करना बंद हो और बैंकों की जिम्मेदारी सुनिश्चित हो। पिछले वर्षों में एजेंटों की बदसलूकी के कई मामले सामने आए थे, जिनमें बिहार का मामला खास चर्चा में रहा था।
नए नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होंगे।
