
देवरिया: उत्तर प्रदेश के पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर बुधवार की शाम देवरिया जेल से गुपचुप रिहा हो गए। उनकी रिहाई का परवाना जेल में ही पहुंच गया था और देर शाम उन्हें जेल से बाहर निकाल दिया गया। यह सब इतनी चुप्पी से हुआ कि पुलिस और अन्य लोगों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
रिहाई के बाद अमिताभ ठाकुर अपने परिजनों के साथ चुपचाप देवरिया से बाहर निकल गए। उनके अधिवक्ता प्रवीण द्विवेदी ने बताया कि शाम को रिहाई का परवाना जेल भेजा गया था और आगे की कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई।
प्लॉट आवंटन फर्जीवाड़े में मुकदमा:
अमिताभ ठाकुर 10 दिसंबर 2025 से देवरिया जेल में बंद थे। उन पर आरोप था कि 1999 में देवरिया के पुलिस अधीक्षक रहते हुए उन्होंने देवरिया औद्योगिक आस्थान में अपनी पत्नी नूतन ठाकुर के नाम से एक प्लॉट का आवंटन फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से कराया। आवंटन के दौरान उनके और पत्नी के नाम गलत दर्ज कर दिए गए थे।
सितंबर 2025 में इस मामले में लखनऊ के तालकटोरा थाने में धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हुआ। 9 दिसंबर को दिल्ली जाते समय शाहजहांपुर में उन्हें गिरफ्तार किया गया और देवरिया जेल भेजा गया। जनवरी में उन्हें जमानत मिल गई थी, लेकिन मामला वारंट बी के चलते देवरिया जेल में लंबित रहा। हाल ही में लखनऊ न्यायालय ने वारंट बी रद्द कर दिया, जिससे उनकी रिहाई संभव हो सकी।
जेल में भी सुर्खियों में रहे:
जेल में रहते हुए अमिताभ ठाकुर कई बार सुर्खियों में रहे। गिरफ्तारी के दौरान जब्त किए गए सामान की मांग को लेकर उन्होंने आमरण अनशन किया था। इसके अलावा उन्होंने जेल में धमकी भरे पत्र मिलने की जानकारी अपने अधिवक्ता के माध्यम से दी। कोडीन कफ सिरप मामले में भी उन्होंने कुछ बड़े नेताओं के नाम लिए और बताया कि उनके पास इस मामले के कई अहम सबूत हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में उनकी गिरफ्तारी को दबाने की कोशिश की गई।
अमिताभ ठाकुर की गुपचुप रिहाई ने देवरिया और पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना दिया है।
