
भोपाल: मध्य प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने मोटर वाहन टैक्स में 100% छूट देने सहित कई योजनाएं शुरू की हैं, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है। राज्य में हर 200 इलेक्ट्रिक वाहनों पर केवल एक चार्जिंग स्टेशन उपलब्ध है।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति:
राज्य में कुल 2 लाख से अधिक ईवी हैं, लेकिन चार्जिंग स्टेशन केवल 1,146 ही हैं। इसी वजह से मध्य प्रदेश ईवी चार्जिंग के मामले में देश में नौवें स्थान पर है। राज्य सरकार के प्रयासों और केंद्र की फेम इंडिया एवं पीएम ई-ड्राइव योजनाओं के बावजूद स्थिति संतोषजनक नहीं है।
सड़क हादसों में बढ़ोतरी:
मध्य प्रदेश ईवी से जुड़े सड़क हादसों में आठवें स्थान पर है। 2024 में राज्य में 663 ईवी हादसे हुए, जिनमें 89 लोगों की मौत और 868 लोग घायल हुए। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने राज्यसभा में आंकड़े पेश किए। उत्तराखंड इस सूची में सबसे ऊपर है, जहां 369 लोग EV हादसों में मारे गए।
विशेषज्ञों की चेतावनी:
विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी दूरी की यात्रा पर जाने वाले EV मालिकों को चार्जिंग स्टेशनों की कमी को ध्यान में रखकर यात्रा की योजना बनानी चाहिए। साथ ही, निजी कंपनियों को चार्जिंग पॉइंट लगाने के लिए और सब्सिडी दी जा रही है, ताकि चार्जिंग की समस्या को धीरे-धीरे कम किया जा सके।
मध्य प्रदेश में EV अपनाने की पहल तो तेज है, लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा उपायों में सुधार न होने पर यह कदम कई लोगों के लिए जोखिम भी पैदा कर रहा है।