
नई दिल्ली: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार अमेरिका के साथ टैरिफ से जुड़े एक गुप्त समझौते की योजना बना रही है। यह डील 9 फरवरी को होने वाली है, जो बांग्लादेश के संसदीय चुनावों से ठीक तीन दिन पहले है। समझौते की अधिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, क्योंकि दोनों देशों के बीच नॉन-डिस्क्लॉजर एग्रीमेंट (NDA) के तहत इसे गोपनीय रखा गया है।
भारत के लिए क्यों चिंता का विषय?
भारत ने हाल ही में अमेरिका के साथ एक ट्रेड डील की थी, जिसके बाद अमेरिका ने भारत पर टैरिफ घटाकर 18% कर दिया। वहीं, बांग्लादेश पर पहले से अमेरिका ने 37% टैरिफ लगाया था, जो जुलाई में 35% और अगस्त में घटाकर 20% कर दिया गया। अब माना जा रहा है कि 9 फरवरी को होने वाली डील में अमेरिका बांग्लादेश पर टैरिफ 20% से घटाकर 15% कर सकता है। इससे भारत को अपनी हाल की डील से मिलने वाले लाभ में प्रतिस्पर्धात्मक चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिका की शर्तें
रिपोर्टों के अनुसार, इस समझौते में अमेरिका ने बांग्लादेश से चीनी आयात घटाने, अमेरिकी सैन्य उपकरणों की खरीद बढ़ाने, और अमेरिकी मानकों को बिना अतिरिक्त निरीक्षण स्वीकार करने जैसी शर्तें रखी हैं। डील का उद्देश्य बांग्लादेश को अमेरिकी कृषि निर्यात और ऑटोमोबाइल बाजार में पहुंच को आसान बनाना है।
बांग्लादेश में विरोध
बांग्लादेश में इस डील का विरोध भी हो रहा है। व्यापार जगत के नेताओं का कहना है कि एक अंतरिम सरकार के लिए इतनी महत्वपूर्ण डील करना उचित नहीं है। BGMEA के वरिष्ठ उपाध्यक्ष इनामुल हक खान ने कहा, “मुझे लगता है कि यह डील चुनाव के बाद होनी चाहिए थी।” वहीं, DCCI के अध्यक्ष तस्कीन अहमद ने भी इस जल्दबाजी वाले कदम पर चिंता जताई।
विश्लेषकों का मानना है कि यह डील भारत-बांग्लादेश-अमेरिका के व्यापार संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर सकती है। भारत के लिए अब यह देखना अहम होगा कि अमेरिकी टैरिफ में संभावित कटौती और बांग्लादेश की बढ़ती प्रतिस्पर्धा कितना प्रभाव डालती है।