
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में 2 लाख से अधिक रजिस्टर्ड ई-रिक्शा हैं, और दिलचस्प तथ्य यह है कि इनकी आधी संख्या केवल तीन इलाकों – रोहिणी, वजीरपुर और लोनी रोड में संचालित होती है। दिल्ली सरकार के आंकड़ों के अनुसार, रोहिणी में अकेले 46,150, वजीरपुर में 30,252 और लोनी रोड में 28,858 ई-रिक्शा चलते हैं। यह राजधानी के उत्तर और पूर्वी हिस्सों में ई-रिक्शा की भारी निर्भरता को दर्शाता है।
अन्य इलाकों में स्थिति:
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वसंत विहार जैसे पॉश इलाके में केवल 234 ई-रिक्शा हैं।
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दक्षिण दिल्ली में कुल 7,806 और मॉल रोड पर 8,184 ई-रिक्शा संचालित हैं।
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जनकपुरी (26,661), द्वारका (20,223), राजौरी गार्डन (10,327), मयूर विहार (9,647) और सूरजमल विहार (8,499) में ई-रिक्शा लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए अहम हो गए हैं।
सुरक्षा चिंताएं:
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कई ई-रिक्शा चालकों के पास ड्राइविंग लाइसेंस और यूनिफॉर्म नहीं हैं।
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वाहन अक्सर गलत साइड से चलते हैं और यातायात नियमों का उल्लंघन करते हैं।
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एक ई-रिक्शा में सिर्फ चार लोग बैठ सकते हैं, लेकिन उत्तर दिल्ली में 7-8 लोग बैठते देखे जाते हैं, जिससे वाहन अस्थिर और खतरनाक हो जाते हैं।
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नाबालिग ई-रिक्शा चालक आम बात है, जो खतरनाक तरीके से यू-टर्न और भारी ट्रैफिक में वाहन चलाते हैं।
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चार्जिंग के समय आग लगने का खतरा भी बड़ा है। पूर्वी दिल्ली के दिलशाद गार्डन में पिछले साल जून में अवैध चार्जिंग के कारण लगी आग में दो लोगों की मौत हो चुकी है।
विशेष टिप्पणी:
यूनाइटेड रेजिडेंट ज्वाइंट एक्शन फोर्स के प्रेसिडेंट अतुल गोयल ने कहा कि नाबालिग और असुरक्षित तरीके से ई-रिक्शा चलाने वाले चालक कई इलाकों में सुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए खतरा बने हुए हैं। वहीं परिवहन विभाग ने भी वाहनों की बनावट और ब्रेकिंग सिस्टम कमजोर होने की चिंता जताई है।
निष्कर्ष:
ई-रिक्शा राजधानी के लिए सुविधाजनक लास्ट-माइल ट्रांसपोर्ट जरूर हैं, लेकिन असुरक्षित संचालन, अधूरी चार्जिंग सुविधाएं और नियमों की अनदेखी शहरवासियों के लिए खतरे का कारण बन रही है।