
मध्यप्रदेश के इंदौर में लगभग एक साल पहले की गई हाईप्रोफाइल एमडी ड्रग कार्रवाई अब पूरी तरह पलट चुकी है। जिस 198 ग्राम पदार्थ को पुलिस ने दो करोड़ रुपए की एमडी ड्रग बताकर जब्त किया था, वह साधारण यूरिया (पोटेशियम नाइट्रेट) निकला। इस खुलासे के बाद जिला न्यायालय ने तेजाजी नगर थाना पुलिस द्वारा दर्ज पूरा मामला खारिज कर दिया और सभी आरोपियों को राहत दे दी। साथ ही कोर्ट ने जब्त किए गए मोबाइल और अन्य सामान लौटाने के भी आदेश दिए।
पूरा मामला 26 फरवरी 2025 का है। उस दिन कंट्रोल रूम से मिली सूचना के आधार पर तेजाजी नगर थाने के एएसआई मनोज दुबे, प्रधान आरक्षक देवेंद्र परिहार, अभिनव शर्मा सहित अन्य पुलिसकर्मी एबी रोड बायपास स्थित कस्तूरबा ग्राम पहुंचे। वहां सड़क किनारे बाइक पर बैठे दो युवकों को पुलिस ने संदिग्ध मानकर रोका। जांच में उनकी पहचान विजय पाटीदार (मंदसौर) और मोहम्मद शाहनवाज (आजाद नगर) के रूप में हुई।
तलाशी के दौरान शाहनवाज की जेब से पाउडरनुमा पदार्थ मिला, जिसे पुलिस ने मौके पर ही एमडी ड्रग बताकर पंचनामा तैयार किया। वजन 198 ग्राम दर्शाते हुए इसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार कीमत लगभग दो करोड़ रुपए आंकी गई। दोनों आरोपियों को एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/22 के तहत गिरफ्तार किया गया। इसके बाद शाहनवाज के कथित मेमोरेंडम के आधार पर थाना पुलिसकर्मी लखन गुप्ता को भी आरोपी बनाया गया।
हालांकि, भोपाल स्थित राज्य फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि जब्त पदार्थ कोई मादक ड्रग नहीं बल्कि पोटेशियम नाइट्रेट (यूरिया) है। हैदराबाद स्थित केंद्रीय फॉरेंसिक साइंस लैब की रिपोर्ट ने भी यही पुष्टि की। दोनों लैबों ने स्पष्ट किया कि यह पदार्थ एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत किसी भी तरह का नशा नहीं है।
इन रिपोर्टों के बाद तेजाजी नगर पुलिस ने कोर्ट में स्वीकार किया कि एमडी ड्रग का मामला तथ्यहीन है। अदालत ने सभी आरोपियों — विजय पाटीदार, मोहम्मद शाहनवाज, राजा उर्फ राजा बाबू और पुलिसकर्मी लखन गुप्ता — को मामले से मुक्त कर दिया। सभी आरोपी पहले से ही जमानत पर थे।