Sunday, May 24

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भारत-अमेरिका ट्रेड डील के पीछे ‘डीलमेकर’ सर्जियो गोर, ट्रंप भी भरोसा करते हैं

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में संपन्न हुई महत्वपूर्ण ट्रेड डील में अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर की भूमिका केंद्रीय साबित हुई है। जनवरी में अपने पद संभालने से पहले ही उन्होंने भारत में कई उच्चस्तरीय मीटिंग्स कर वॉशिंगटन के साथ संवादहीनता को कम किया और डील के रास्ते को सुगम बनाया।

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नियुक्ति से पहले ही भारत दौरे पर

सर्जियो गोर ने 14 जनवरी को अपने क्रेडेंशियल सौंपे और औपचारिक रूप से राजदूत पद संभाला, लेकिन अक्टूबर 2025 में ही वे दिल्ली आकर पीएम मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वाणिज्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात कर चुके थे। इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी को एक तस्वीर भेंट की, जो पीएम और राष्ट्रपति ट्रंप की पिछली साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ी थी।

संवादहीनता को कम करने की कोशिश

पिछले साल अगस्त में राष्ट्रपति ट्रंप ने गोर को भारत का नया राजदूत घोषित किया था। यह समय इसलिए भी अहम था क्योंकि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में असहमति और संवादहीनता का दौर चल रहा था। सर्जियो गोर ने दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच इस खाई को पाटने में अहम भूमिका निभाई।

ट्रंप का भरोसा

पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप के करीबी गोर को व्हाइट हाउस का प्रभावशाली इनसाइडर माना जाता है। ट्रंप ने खुद कहा कि गोर ने कम समय में लगभग 4,000 लोगों को सरकारी पदों पर नियुक्त कर अपने एजेंडे को आगे बढ़ाया। यही कारण है कि ट्रंप ने राजदूत के लिए उन्हें चुना और इस चयन में सात महीने का समय लिया।

व्यवहारिक कूटनीति ने डील को गति दी

ट्रंप प्रशासन के दौरान टैरिफ और विवादित बयानों ने भारत को आर्थिक और कूटनीतिक चुनौतियों का सामना कराया। इस बीच भारत ने यूरोपीय संघ और यूके के साथ व्यापारिक साझेदारियों को बढ़ावा दिया। विशेषज्ञ मानते हैं कि EU डील के बाद अमेरिका के साथ डील को तेजी मिली। भारत ने अपनी विविध आर्थिक रणनीति और संयमित प्रतिक्रिया से अमेरिका को यह संदेश दिया कि दोनों देशों में आपसी साझेदारी मजबूत है और भारत किसी एक देश पर निर्भर नहीं रहेगा।

आगे का रास्ता

अब ट्रेड डील के बाद भारत और अमेरिका के संबंध नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ सकते हैं। दोनों देश तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में और करीब आएंगे। सूत्रों के अनुसार, भारत अमेरिकी पहल पैक्स सिलिका का भी हिस्सा बन सकता है, जिससे द्विपक्षीय संबंध और मजबूत होंगे।

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