
जोधपुर: राजस्थान में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत की गुत्थी सुलझने के बजाय और उलझती जा रही है। मामले में नर्सिंग कर्मी देवीसिंह राजपुरोहित ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि उन्होंने 28 जनवरी को डॉक्टर की सलाह पर डेक्सोना और डायनपार इंजेक्शन दिए थे। उन्होंने बताया, “मैं 18 सालों से सरकारी सेवा में हूं। मैंने कभी गलत काम नहीं किया और बाईसा व उनके सेवादारों का पहले भी इलाज किया है। मैं पुलिस जांच में पूरा सहयोग कर रहा हूं।”
साध्वी के पिता विरमनाथ ने अपने भावुक बयान में कहा कि वह संतों के दबाव में अपना लिया हुआ संकल्प पूरा नहीं कर पाए। उन्होंने बताया कि जिस दिन घटना हुई, उन्होंने अपनी बेटी के लिए दाल लेकर कमरे में गए थे, जिसके कुछ देर बाद साध्वी को सांस लेने में तकलीफ हुई।
मामले की जांच अब पूरी तरह विसरा रिपोर्ट पर टिकी हुई है। रिपोर्ट यह बताएगी कि क्या मौत इंजेक्शन के कारण हुई या किसी और वजह से। तब तक नर्सिंग कर्मी का अनुभव और पिता की भावनात्मक बातें इस केस को रहस्यमयी बनाए हुए हैं।