
चाईबासा: झारखंड के कोल्हान प्रमंडल की सेरेंगसिया घाटी हर साल 2 फरवरी को इतिहास के उन पन्नों को याद करती है, जब 1837 में आदिवासी लड़ाकों ने अंग्रेजों की बड़ी फौज को तीर-धनुष, विशेष गुलेल और पत्थरों से परास्त कर दिया था। इस छापामार युद्ध में अंग्रेजों के 100 से अधिक सैनिक मारे गए, जबकि 26 आदिवासी वीर शहीद हुए। बाद में अंग्रेजों ने विद्रोह के नायक पोटो हो और उनके साथियों को गिरफ्तार कर सरेआम फांसी दी थी।
सेरेंगसिया घाटी में शहीद मेला और श्रद्धांजलि
इस गौरवशाली शहादत की स्मृति में हर साल 2 फरवरी को सेरेंगसिया घाटी में शहीद मेला आयोजित किया जाता है। सोमवार को भी यहां हजारों लोग जुटे और शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, मंत्री दीपक बिरुआ और सांसद जोबा माझी ने शहीद स्मारकों पर शीश नवाया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने पश्चिमी सिंहभूम जिले को कई विकास योजनाओं की सौगात दी और 1,479 युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए।
‘हो’ जनजाति के लोग खुद को मानते थे स्वतंत्र
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि अंग्रेजों से लोहा लेते हुए शहीद हुए पुरखों के सपनों का राज स्थापित करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। अंग्रेजी शासन के दौरान कोल्हान बंगाल प्रेसिडेंसी का हिस्सा था, लेकिन ‘हो’ जनजाति के लोग खुद को स्वतंत्र मानते थे।
घात लगाकर अंग्रेजों पर हमला
1821 से आदिवासियों में असंतोष पनपने लगा, जो धीरे-धीरे विद्रोह में बदल गया। अंग्रेजों ने इलाके पर कब्जा करने के लिए कैप्टन विलकिंसन और कैप्टन आर्मस्ट्रांग के नेतृत्व में बड़ी सेना भेजी। लेकिन पोटो हो और उनके साथियों को पहले से इसकी भनक लग चुकी थी। उन्होंने सेरेंगसिया घाटी में घात लगाया और अंग्रेजों पर तीरों की बौछार शुरू कर दी। दुर्गम पहाड़ियों और जंगलों में छेड़ा गया यह छापामार युद्ध अंग्रेजों के लिए भारी साबित हुआ।
संघर्ष और शहादत
इस युद्ध में अंग्रेजों के 100 से अधिक सैनिक मारे गए, जबकि 26 आदिवासी शहीद हुए। इस हार ने अंग्रेजों के लिए अपमानजनक स्थिति पैदा की। बदले में उन्होंने राजाबसा गांव पर हमला कर भारी रक्तपात मचाया। दिसंबर 1837 में पोटो हो और उनके साथियों को गिरफ्तार कर 1 जनवरी 1838 को जगन्नाथपुर में फांसी दी गई। इसके अलावा 79 आदिवासी योद्धाओं को जेल भेजा गया।
398 करोड़ की योजनाओं की सौगात
शहीद मेला के अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 398 करोड़ 19 लाख 35 हजार 298 रुपये की लागत से 197 विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। विभिन्न विभागों से संबंधित योजनाओं की परिसंपत्तियां 3 लाख 77 हजार 256 लाभार्थियों में बांटी गईं। साथ ही 1,479 युवाओं को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किए गए।