
भारत की वायु रक्षा और लड़ाकू विमान क्षमताओं से जुड़ी एक बड़ी रणनीतिक चिंता अब समाप्त होती नजर आ रही है। रूस ने घोषणा की है कि वह S-400 एयर डिफेंस सिस्टम और पांचवीं पीढ़ी के Su-57 लड़ाकू विमान में इस्तेमाल होने वाली अत्याधुनिक माइक्रोवेव माइक्रोचिप्स का घरेलू स्तर पर बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करने जा रहा है। इस कदम से इन सैन्य प्लेटफॉर्म्स में चीनी चिप्स के इस्तेमाल और उससे जुड़ी साइबर जासूसी की आशंकाओं पर विराम लगने की उम्मीद है।
रूस के स्वेर्दलोव्स्क ओब्लास्ट प्रांत के गवर्नर डेनिस पासलर ने बताया कि एक रूसी कंपनी ने देश की पहली ऐसी फैक्ट्री का डिजाइन और निर्माण शुरू कर दिया है, जहां माइक्रोवेव माइक्रोचिप्स का पूरे तकनीकी चक्र के साथ सीरियल प्रोडक्शन किया जाएगा। यह उत्पादन 2027 के अंत तक शुरू होने की संभावना है।
भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला
भारत वर्तमान में रूस से मिले S-400 एयर डिफेंस सिस्टम को ऑपरेट कर रहा है और भविष्य में Su-57 लड़ाकू विमान को लेकर भी विकल्पों पर विचार कर रहा है। अब तक भारत की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि इन उन्नत हथियार प्रणालियों में इस्तेमाल होने वाले कुछ क्रिटिकल सेमीकंडक्टर और माइक्रोचिप्स चीन से सोर्स किए जाते हैं, जिससे संवेदनशील सैन्य डेटा की सुरक्षा पर खतरा पैदा हो सकता था।
रूस द्वारा इन चिप्स का स्वदेशी उत्पादन शुरू करने से यह आशंका काफी हद तक खत्म हो जाएगी, जिसे भारत की रणनीतिक सुरक्षा के लिहाज से बड़ी राहत माना जा रहा है।
क्या हैं माइक्रोवेव माइक्रोचिप्स
भारतीय वायुसेना के पूर्व फाइटर पायलट और एविएशन टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ विजयेन्द्र के. ठाकुर के अनुसार, माइक्रोवेव माइक्रोचिप्स विशेष प्रकार के इंटीग्रेटेड सर्किट होते हैं, जो 300 मेगाहर्ट्ज से 300 गीगाहर्ट्ज तक की फ्रीक्वेंसी पर काम करते हैं। इनका उपयोग रडार सिस्टम, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, ड्रोन, हाई-स्पीड डेटा प्रोसेसिंग और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर में किया जाता है।
इन चिप्स की मदद से रडार सिग्नल डिकोडिंग, टारगेट ट्रैकिंग, पैटर्न रिकग्निशन और रियल-टाइम डेटा प्रोसेसिंग संभव हो पाती है।
Su-57 और S-400 में इन चिप्स की भूमिका
Su-57 लड़ाकू विमान में इस्तेमाल होने वाला N036 ‘बायेलका’ रडार एक अत्याधुनिक X-बैंड AESA (एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड एरे) सिस्टम है, जो 400 किलोमीटर तक लक्ष्य का पता लगाने, एक साथ दर्जनों हवाई और जमीनी टारगेट को ट्रैक करने और कई लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम है।
इसी तरह S-400 और S-500 एयर डिफेंस सिस्टम में इस्तेमाल होने वाला ‘येनिसेई’ रडार एक एडवांस्ड S-बैंड AESA रडार है, जो लंबी दूरी तक बैलिस्टिक और एयरोडायनामिक लक्ष्यों की सटीक पहचान और ट्रैकिंग कर सकता है। इन सभी रडार सिस्टम्स की रीढ़ यही माइक्रोवेव माइक्रोचिप्स होती हैं।
चीन पर निर्भरता क्यों थी चिंता
पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद रूस को एडवांस सेमीकंडक्टर और जरूरी मशीनरी की आपूर्ति में दिक्कतें आईं। ऐसे में कई रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि रूस को कुछ माइक्रोचिप्स और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के लिए चीन पर निर्भर होना पड़ा। यही पहलू भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता बना हुआ था।
अब रूस द्वारा स्वदेशी चिप उत्पादन की घोषणा को चीन पर निर्भरता कम करने और संवेदनशील रक्षा प्रणालियों को सुरक्षित बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
भारत के लिए आगे का रास्ता
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल भारत-रूस रक्षा सहयोग को और मजबूत करेगा, बल्कि भारत के लिए भविष्य में S-400 के अतिरिक्त सिस्टम और Su-57 जैसे प्लेटफॉर्म्स पर निर्णय लेना भी आसान बना सकता है। इसके साथ ही भारत की ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ के तहत स्वदेशी MMIC और एडवांस्ड चिप डिजाइन योजनाओं को भी बल मिलेगा।
रणनीतिक संदेश
रूस का यह कदम न सिर्फ चीन को तकनीकी मोर्चे पर झटका माना जा रहा है, बल्कि यह संकेत भी देता है कि मॉस्को अपनी रक्षा तकनीक को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है—जिसका सीधा फायदा भारत जैसे भरोसेमंद साझेदारों को मिलेगा।