
चंडीगढ़: पंजाब के पूर्व मंत्री और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। आय से अधिक संपत्ति के मामले में करीब सात महीने न्यायिक हिरासत में रहने के बाद मजीठिया को सोमवार को जमानत दी गई। यह फैसला उनके साथ-साथ शिरोमणि अकाली दल के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बिक्रम सिंह मजीठिया को पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने पिछले साल जून में अमृतसर स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया था। 25 जून 2025 से वे नाभा जेल में बंद थे। सुप्रीम कोर्ट ने 700 करोड़ रुपये की आय से अधिक संपत्ति के मामले में उन्हें जमानत दी।
मामले की पृष्ठभूमि
पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने मजीठिया के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PCA) के तहत केस दर्ज किया था। आरोप है कि 2007 से 2017 तक विधायक और कैबिनेट मंत्री रहने के दौरान मजीठिया ने अपनी आय से अधिक लगभग 540 करोड़ रुपये की संपत्ति जमा की। इसके साथ ही उनके और उनकी पत्नी पर विदेशी नेटवर्क के माध्यम से संपत्ति बनाने का भी आरोप था।
गिरफ्तारी के बाद मजीठिया ने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में जमानत याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। विजिलेंस ब्यूरो ने अगस्त 2025 में उनके खिलाफ 40,000 पन्नों की विशाल चार्जशीट भी दायर की थी।
सात महीने की जेल और सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सात महीने से अधिक समय तक हिरासत में रहने के बाद मजीठिया सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता को 2022 में पहले एनडीपीएस मामले में जमानत मिल चुकी है। इसके खिलाफ राज्य सरकार की याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि मामला 2007-2017 के कार्यकाल से संबंधित है, जबकि आय से अधिक संपत्ति का केस 2025 में दर्ज किया गया।
मजीठिया अब जमानत पर रिहा हैं और आगे की कानूनी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार पूरी होगी।