Wednesday, March 4

वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से बिहार में जमीन के रेट होंगे आसमान छूने वाले

पटना, 2 फरवरी 2026: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के बजट में वाराणसी-सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर बनाने की घोषणा की है। यह 700 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर बिहार के बक्सर, आरा, पटना, कटिहार और किशनगंज जिलों से होकर गुजरेगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस परियोजना के आने से इन जिलों में जमीन के दाम कम से कम 20 प्रतिशत तक बढ़ जाएंगे

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बढ़ेगी बिहार की कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास
इस हाई-स्पीड कॉरिडोर के बनने से बिहार के शहरों की देशभर से कनेक्टिविटी बेहतर होगी। पटना से लेकर बक्सर और कटिहार तक यात्रा का समय घटेगा और माल ढुलाई भी तेजी से होगी। इस कॉरिडोर पर ट्रेनों की गति 300 किलोमीटर प्रति घंटे तक हो सकती है, जिससे यात्रियों को सुविधा और व्यापार को गति दोनों मिलेगी।

भूमि के दाम में उछाल
रियल इस्टेट विशेषज्ञ प्रदीप महापात्रा के अनुसार, “नई रेल या सड़क परियोजनाओं के आने से हमेशा जमीनों के दाम बढ़ते हैं। इस हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से जुड़े जिलों में जमीन के रेटों में 20 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी तय है। हालांकि यह बढ़ोतरी स्थान और सड़क संपर्क पर भी निर्भर करेगी।”

जिलेवार अनुमानित रेट

  • बक्सर: ग्रामीण कृषि भूमि 2,500–7,000 रुपये प्रति डिसमिल; आवासीय जमीन 8,000–20,000 रुपये प्रति डिसमिल; मुख्य सड़क पर 10–28 लाख रुपये प्रति डिसमिल।

  • आरा (भोजपुर): ग्रामीण कृषि भूमि 2–8 लाख रुपये प्रति कट्ठा; शहरी क्षेत्र 4,000–7,500 रुपये प्रति वर्ग फुट।

  • पटना: शहरी भूमि 1.5 करोड़–7 करोड़ रुपये प्रति कट्ठा; कृषि भूमि 1 लाख–28 लाख रुपये प्रति कट्ठा।

  • कटिहार: ग्रामीण आवासीय जमीन 600–1,500 रुपये प्रति वर्ग फुट; कृषि भूमि 15–30 लाख रुपये प्रति एकड़; शहरी भूमि 2,000–11,000 रुपये प्रति वर्ग फुट।

  • किशनगंज: ग्रामीण कृषि भूमि 4–10 लाख रुपये प्रति कट्ठा; शहरी आवासीय जमीन 10–15 लाख रुपये प्रति कट्ठा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह हाई-स्पीड रेल परियोजना न केवल यात्रियों और माल ढुलाई को सुविधा प्रदान करेगी, बल्कि बिहार के औद्योगिक और रियल एस्टेट क्षेत्र में भी नई उम्मीदें जगाएगी।

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