Monday, February 2

महात्मा गांधी सेतु के जाम से बेहतर था गंगा में सफर, पटना–मुजफ्फरपुर की यात्रा होती थी आनंददायक

 

This slideshow requires JavaScript.

 

पटना: 1917 में चंपारण सत्याग्रह के दौरान महात्मा गांधी पटना के बांकीपुर स्टेशन पर उतरे थे। यहीं से वे स्टीमर के जरिए पहलेजा घाट पहुँचे थे। उस समय सोनपुर, हाजीपुर, मुजफ्फरपुर और चंपारण जाने का एकमात्र सुरक्षित और किफायती साधन जलमार्ग ही था।

 

स्टीमर यात्रा का सुखद अनुभव

 

पटना के महेन्द्रू घाट से रेलवे का स्टीमर सोनपुर के पहलेजा घाट तक नियमित रूप से चलता था। इस यात्रा में करीब एक घंटा 15 मिनट का समय लगता था। यात्रियों के लिए दो मंजिला जहाजों, कैंटीन और किताबों की दुकानों का प्रबंध था। यात्री चाय-नाश्ता करते, अखबार या पत्रिका पढ़ते और गंगा की लहरों के बीच यात्रा का आनंद लेते।

 

महात्मा गांधी ने भी पटना से मुजफ्फरपुर तक इसी जलमार्ग का इस्तेमाल किया था। पहलेजा घाट पर उतरने के बाद वे ट्रेन से सोनपुर पहुँचे और फिर मुजफ्फरपुर के लिए आगे बढ़े। वहाँ उन्होंने आचार्य कृपलानी के यहाँ चार दिन ठहरकर चंपारण के लिए सड़क मार्ग से प्रस्थान किया।

 

जल परिवहन का व्यावसायिक महत्व

 

एलटीसी घाट और बांस घाट जैसे पोर्ट ब्रिटिश राज के समय माल ढुलाई और यातायात के प्रमुख केंद्र थे। बड़े-बड़े ट्रक, वाहन और अन्य सामान पानी के जहाजों से उत्तर बिहार के विभिन्न हिस्सों तक पहुँचते थे। 1977 तक सरकारी कर्मचारियों के तबादलों के दौरान भी सामान स्टीमर से ही पहलेजा घाट पहुँचता था।

 

पुल बनने के बाद जल यात्रा का अंत

 

1982 में गंगा पर महात्मा गांधी सेतु का निर्माण हुआ। इसके बाद स्टीमर सेवा बंद हो गई और जल यात्रा का सुखद अनुभव समाप्त हो गया। अब पटना–हाजीपुर या हाजीपुर–पटना का सफर जाम और महंगे परिवहन की वजह से तनावपूर्ण बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जल परिवहन आज भी सबसे सस्ता और सुरक्षित यातायात साधन हो सकता है।

 

पटना में अब शिप रिपेयर सेंटर खोलने की योजना है, जिससे गंगा नदी के माध्यम से व्यापार और यातायात को पुनः गति दी जा सकेगी।

 

 

Leave a Reply