
नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बजट 2026 पेश करते हुए मेडिकल और हेल्थ सेक्टर में 1 लाख नई नौकरियों की घोषणा की। वित्त मंत्री ने बताया कि अगले पांच साल में एलाइड हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स (AHPs) को जोड़ने के लिए मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा और नए सेंटर खोले जाएंगे।
एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स कौन होते हैं?
एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स सीधे तौर पर डॉक्टर या नर्स नहीं होते, लेकिन वे उनके साथ मिलकर मरीजों की देखभाल और स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन्हें पैरामेडिकल या सपोर्टिंग हेल्थ प्रोफेशनल्स भी कहा जाता है। आसान भाषा में समझें तो हॉस्पिटल या स्वास्थ्य केंद्रों में टेक्नीशियन, असिस्टेंट और सपोर्ट स्टाफ को एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स कहते हैं।
इनका काम क्या होता है?
एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स के जिम्मे कई अहम कार्य होते हैं, जैसे:
-
मरीजों के सैंपल टेस्ट करना और रिपोर्ट तैयार करना
-
मरीजों की देखभाल और थेरेपी देना
-
सर्जरी या मेडिकल प्रोसीजर्स में डॉक्टर की मदद करना
-
डाइट और हेल्थ प्लान तैयार करना
-
हेल्थ सेंटर के अन्य सपोर्टिंग काम
एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स बनने के लिए योग्यता:
-
शैक्षिक योग्यता: 12वीं साइंस (PCB – फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी) पास।
-
कोर्स: 12वीं के बाद एंट्रेंस एग्जाम देकर मान्यता प्राप्त संस्थान से DMLT, DOT, DRIT जैसे डिप्लोमा (2–3 साल) या B.Sc. मेडिकल लैब टेक्नीशियन, B.Sc. रेडियोलॉजी, B.Sc. ऑप्टोमेट्री (3.5–5 साल) किया जा सकता है।
-
इसके बाद, M.Sc या पीजी डिप्लोमा के विकल्प भी उपलब्ध हैं।
कानूनी मानक:
नेशनल कमीशन फॉर एलाइड एंड हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स एक्ट, 2021 के अनुसार:
-
एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स के लिए 12वीं के बाद संबंधित फील्ड में 2–4 साल का डिप्लोमा या डिग्री।
-
हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स बनने के लिए 3–6 साल का डिग्री कोर्स।
रोजगार के अवसर:
कोर्स पूरा करने के बाद प्राइवेट और सरकारी हॉस्पिटल, क्लीनिक और हेल्थ सेंटर में नौकरी के अवसर मिलते हैं। बजट 2026 के तहत अगले पांच साल में 1 लाख एलाइड हेल्थ प्रोफेशनल्स को नई नौकरियों में जोड़ा जाएगा।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह पहल हेल्थ सेक्टर को मजबूत करने और युवाओं को रोजगार देने के लिए अहम कदम है।