
नई दिल्ली: 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 से पहले क्रिप्टोकरेंसी सेक्टर में उत्सुकता और उम्मीद दोनों है। निवेशक चाहते हैं कि सरकार क्रिप्टो निवेशकों पर लागू भारी टैक्स को आसान और स्पष्ट करे, या किसी तरह से राहत प्रदान करे।
क्रिप्टोकरेंसी में निवेश का हाल
भारत में क्रिप्टोकरेंसी यानी वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA) में लोगों की रुचि बढ़ रही है। लेकिन उच्च टैक्स और नियमों की अस्पष्टता के कारण इसमें निवेश करना महंगा और चुनौतीपूर्ण है।
टैक्स की वर्तमान स्थिति
इनकम-टैक्स एक्ट 1961 के सेक्शन 115BBH के तहत VDA ट्रांसफर पर 30% की फ्लैट दर से टैक्स लगता है।
इसके अलावा सरचार्ज और सेस भी जोड़े जाते हैं।
IT एक्ट के सेक्शन 194S के तहत 1% TDS लगता है जब किसी फाइनेंशियल ईयर में लेन-देन 10,000 रुपये से ज्यादा हो।
मौजूदा नियमों के अनुसार, VDA से होने वाले नुकसान को अन्य VDA से हुए लाभ के साथ सेट ऑफ नहीं किया जा सकता और भविष्य में भी आगे नहीं ले जाया जा सकता।
एक्सपर्ट्स की राय
PNAM & Co LLP के पार्टनर सीए मोहित गुप्ता का कहना है कि बजट में सेक्शन 194S के तहत TDS को आसान बनाना चाहिए। मौजूदा दर से मार्केट में लिक्विडिटी पर असर पड़ा है और ट्रेडिंग वॉल्यूम विदेशी प्लेटफॉर्म पर चला गया है।
डॉ. सुरेश सुरना के अनुसार, निवेशकों के असली नुकसान को ध्यान में रखे बिना कुल कमाई पर टैक्स लगाना सही नहीं है। बेहतर होगा कि VDA के नुकसान को अगले कुछ सालों (जैसे 4-8 साल) तक आगे ले जाने की अनुमति दी जाए।
ग्लोबल हेड ऑफ पेमेंट्स एंड RWAs, ऐश्वर्य गुप्ता बताते हैं कि भारत में क्रिप्टो टैक्स दुनिया में सबसे सख्त है। भारत में 30% टैक्स लगता है, जबकि यूएई और सिंगापुर में कोई टैक्स नहीं है।
आख़िरी उम्मीदें
क्रिप्टो सेक्टर निवेशक उम्मीद कर रहे हैं कि बजट 2026 में टैक्स को आसान और समझने योग्य बनाया जाए और किसी तरह से निवेशकों को राहत दी जाए। अगर सरकार यह कदम उठाती है, तो भारत में डिजिटल एसेट्स का इकोसिस्टम और परिपक्व होगा और निवेशकों की भागीदारी बढ़ेगी।