
पटना: पटना के एक सुरक्षा गार्ड, कुमार विनय, ने कोरोना काल में अपने दिल का बड़ा बदलाव देखा और आज गरीबों को खाना खिलाने का मिशन अपनी पूरी सैलरी से निभा रहे हैं। उनकी कहानी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है।
कुमार विनय पटना के एक अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में सुरक्षा गार्ड के रूप में तैनात थे। महीने की मात्र 8,000 रुपये की सैलरी लेने वाले विनय ने कोरोना के चरम समय में हर दिन 25 से अधिक लोगों की मौतें अपने सामने देखीं। स्ट्रेचर पर लाए गए मरीज, बाहर ले जाते समय तड़पती हुई लाशें और टूटते परिवारों को देखकर उनका हृदय हमेशा के लिए बदल गया।
विनय ने बताया, “उन मौतों ने मुझे अंदर तक हिला दिया। मुझे एहसास हुआ कि जिंदगी में कुछ भी स्थायी नहीं है, हम अपने साथ केवल लोगों के आशीर्वाद ही ले जाते हैं। यही एहसास मेरे जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गया।”
इस बदलाव के बाद उन्होंने अपनी छोटी सैलरी से हर दिन 21 भूखों के लिए खाना बनाना शुरू किया। पैकेट तैयार कर वह उन्हें पटना के जंक्शन, पंच मंदिर, कंकड़बाग और बांसघाट मंदिर में बांटते। शुरुआत में परिवार वाले विरोध कर रहे थे, लेकिन समय के साथ उनका समर्थन मिला।
आज कुमार विनय के काम में उनके दोस्त और शुभचिंतक भी उनका साथ दे रहे हैं। नरेंद्र कुमार पप्पू जैसे लोग जन्मदिन, पुण्यतिथि या किसी विशेष अवसर पर उनकी पहल में योगदान देते हैं।
कुमार विनय अब एक ऑटोमोबाइल कंपनी के एरिया ऑफिस में 14,000 रुपये सैलरी पर गार्ड के रूप में काम करते हैं। उनकी पत्नी सविता देवी की दोनों किडनी खराब हैं, लेकिन इसके बावजूद विनय जरूरतमंदों की मदद का मिशन जारी रखे हुए हैं। उनके बच्चे, कुमारी शीतल और कुमार सौरभ, घर के खर्चों में मदद करते हैं।
विनय कहते हैं, “अगर आपके पास इच्छाशक्ति और बड़ा दिल है, तो हमेशा कोई न कोई रास्ता निकल ही आता है। मैं यह पक्का करता हूं कि यह खाना बुज़ुर्गों और दिव्यांग लोगों तक पहुंचे।”
पटना के लिए कुमार विनय का यह उदाहरण न केवल मानवता की प्रेरणा है, बल्कि यह संदेश देता है कि कठिन परिस्थितियों में भी संवेदनशीलता और दया की ताकत दुनिया बदल सकती है।