Friday, January 30

महंगाई से लड़ने के लिए खर्च में कटौती नहीं है उपाय, कमाई बढ़ाइए और मौजा ही मौजा

 

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आज के दौर में हर व्यक्ति महंगाई (Inflation) से परेशान है। घर-गृहस्थी के सामान महंगे हो गए हैं, किराया बढ़ा है और रोजमर्रा के खर्चों में लगातार वृद्धि हो रही है। आमदनी बढ़ने की रफ़्तार महंगाई की तुलना में धीमी है। ऐसे में ज्यादातर लोग अपने खर्चों में कटौती करके पैसे बचाने की कोशिश करते हैं।

 

खर्च कटौती का तरीका बेकार?

चार्टर्ड अकाउंटेंट नितिन कौशिक का कहना है कि सिर्फ खर्च कम करना महंगाई से निपटने का असरदार उपाय नहीं है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर उन्होंने लिखा कि यह तरीका ज़्यादातर मामलों में नुकसानदेह साबित होता है। उनका कहना है कि महंगाई कोई अस्थायी समस्या नहीं है, बल्कि यह सिस्टम का हिस्सा है। पिछले तीन साल में रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाली चीजों के दाम करीब 20 फीसदी बढ़ चुके हैं।

 

अलग रणनीति अपनाएं

सीए नितिन कौशिक ने इसे आसान उदाहरण से समझाया। मान लीजिए किसी व्यक्ति का महीने का खर्च 4,000 रुपये है। यदि वह खर्च 10% कम कर भी लेता है, तो सिर्फ 400 रुपये बचेंगे। इसके लिए जीवनशैली में काफी कटौती करनी पड़ती है, लेकिन इसका फ़ायदा बहुत कम होता है।

 

इसके विपरीत, यदि वही व्यक्ति नई स्किल सीखकर, बेहतर नौकरी हासिल करके या कोई साइड बिजनेस शुरू करके कमाई 20% बढ़ा ले, तो उसकी बचत कम से कम 800 रुपये होगी। मेहनत शायद उतनी ही लगे, लेकिन नतीजा कहीं ज़्यादा बेहतर होगा।

 

कटौती की सीमा, कमाई की कोई सीमा नहीं

नितिन कौशिक का कहना है कि खर्च में कटौती की अपनी एक सीमा होती है; आप खर्च को शून्य से नीचे नहीं ले जा सकते। लेकिन कमाई बढ़ाने की कोई ऊपरी सीमा नहीं है। नई स्किल्स सीखकर, बेहतर नौकरी पाकर या अतिरिक्त स्रोत से आय बढ़ाकर आप अपनी बचत और वित्तीय सुरक्षा को दोगुना कर सकते हैं।

 

निष्कर्ष:

महंगाई से निपटने के लिए घर के खर्च घटाने की बजाय अपनी कमाई बढ़ाना और नई संभावनाओं का फायदा उठाना अधिक असरदार उपाय है। यही तरीका न केवल बचत बढ़ाता है, बल्कि जीवन स्तर को भी बनाए रखता है।

 

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