Friday, January 30

गाजियाबाद में झोलाछाप डॉक्टरों पर बड़ी कार्रवाई, 74 के खिलाफ एफआईआर दर्ज 144 फर्जी डॉक्टरों की पहचान, क्लिनिक सील और गिरफ्तारी की तैयारी

गाजियाबाद। जिले में झोलाछाप डॉक्टरों के कारण मरीजों की जान को हो रहे खतरे पर अब प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा कराए गए व्यापक सर्वे में जिलेभर में 144 झोलाछाप डॉक्टर बिना वैध डिग्री और लाइसेंस के इलाज करते पाए गए हैं। इनमें से 74 झोलाछापों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है, जबकि शेष के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।

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प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अब ऐसे फर्जी डॉक्टरों की दुकानें केवल सीज ही नहीं होंगी, बल्कि गिरफ्तारी भी की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद जिलेभर में अवैध रूप से क्लिनिक चला रहे झोलाछापों में हड़कंप मचा हुआ है।

गलत इलाज से हर महीने बिगड़ रहे 10–15 मरीज

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में हर महीने 10 से 15 ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें गलत दवा या लापरवाही भरे इलाज के कारण मरीजों की हालत गंभीर हो जाती है। कई मामलों में मरीजों को मजबूरी में सरकारी अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है।

बिना प्रशिक्षण इंजेक्शन और ड्रिप का इस्तेमाल

जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि कई झोलाछाप बिना किसी चिकित्सकीय प्रशिक्षण के इंजेक्शन, ड्रिप और प्रतिबंधित दवाइयों का खुलेआम इस्तेमाल कर रहे हैं। मरीजों को गुमराह कर लंबा इलाज चलाया जाता है और मोटी रकम वसूली जाती है।

पिछले एक साल में 250 से अधिक नोटिस

नोडल अधिकारी डॉ. देवी लाल ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने पिछले एक वर्ष में 250 से अधिक झोलाछाप डॉक्टरों को नोटिस जारी किए हैं। जुलाई 2025 में भी खोड़ा के आजाद विहार और इंदिरा विहार क्षेत्रों में 13 झोलाछाप डॉक्टरों पर मुकदमा दर्ज कराया गया था, जिनके पास कोई वैध डिग्री नहीं पाई गई।

इन इलाकों में सबसे ज्यादा शिकायतें

स्वास्थ्य विभाग ने विजयनगर, नंदग्राम, खोड़ा, लोनी, मोदीनगर, मुरादनगर, गिरधरपुर और पंचवटी जैसे संवेदनशील इलाकों को चिन्हित किया है, जहां झोलाछाप डॉक्टरों की गतिविधियां लगातार सामने आ रही थीं। इन क्षेत्रों में अब निरंतर निरीक्षण और जांच अभियान चलाया जा रहा है।

ऐसे फैलाते हैं झोलाछाप अपना नेटवर्क

रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश झोलाछाप ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में क्लिनिक खोलते हैं। अस्पतालों की दूरी का फायदा उठाकर ये लोग क्लिनिक बोर्ड पर ऐसी डिग्रियां लिखते हैं, जिन्हें आम लोग समझ नहीं पाते। कम फीस के लालच में आर्थिक रूप से कमजोर लोग इनके जाल में फंस जाते हैं। कई झोलाछाप अपने मूल निवास से दूर क्लिनिक खोलते हैं, ताकि कार्रवाई की स्थिति में आसानी से फरार हो सकें।

सीएमओ की अपील

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अखिलेश मोहन ने जनता से अपील की है कि इलाज के लिए केवल पंजीकृत डॉक्टरों और मान्यता प्राप्त अस्पतालों का ही चयन करें। यदि कहीं भी अवैध रूप से इलाज किए जाने की जानकारी मिले, तो तुरंत स्वास्थ्य विभाग या प्रशासन को सूचित करें।

 

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