
नई दिल्ली: साल 2026-27 का बजट अगले रविवार को पेश होने वाला है और इसके लिए विभिन्न सेक्टर केंद्रीय वित्त मंत्रालय के समक्ष अपनी विश लिस्ट पेश कर रहे हैं। रियल एस्टेट डेवलपर्स के प्रमुख संगठन CREDAI और NAREDCO ने बजट में होम लोन ब्याज पर मिलने वाली इनकम टैक्स छूट बढ़ाने और रेंटल हाउसिंग को प्रोत्साहित करने की मांग की है।
होम लोन ब्याज पर छूट बढ़ाने की मांग
CREDAI और NAREDCO ने कहा कि वर्तमान में होम लोन पर ब्याज के लिए आयकर छूट की सीमा ₹2 लाख है। उन्होंने इसे बढ़ाकर ₹5 लाख करने की मांग की है। CREDAI के प्रेसिडेंट शेखर पटेल ने कहा कि वर्तमान में अफोर्डेबल हाउसिंग की परिभाषा ₹45 लाख तक के मकानों पर लागू है, जबकि महानगरों में इस कीमत में दो कमरे का साधारण मकान भी नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि 2017 के बाद इस परिभाषा में कोई बदलाव नहीं हुआ, जबकि निर्माण सामग्री और भूमि की कीमतें बढ़ चुकी हैं।
रेंटल हाउसिंग को प्रोत्साहन की मांग
NAREDCO के प्रेसिडेंट प्रवीण जैन ने कहा कि बजट 2026 में रेंटल हाउसिंग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इसके लिए आयकर नियमों में ढील दी जाए और टैक्स हॉलिडे की समय सीमा बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान नियमों में रेंटल हाउसिंग के लिए टैक्स छूट केवल तभी मिलती है जब प्रोजेक्ट केंद्र सरकार द्वारा नोटिफाई किया गया हो। इस शर्त को हटाने से डेवलपर्स को प्रोजेक्ट शुरू करने में मदद मिलेगी।
स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने का सुझाव
वर्तमान में रेंटल इनकम पर रिपेयर और मेंटेनेंस के लिए 30% स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलता है। NAREDCO ने इसे 50% तक बढ़ाने का सुझाव दिया है। उनका मानना है कि इससे रेंटल हाउसिंग में निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलेगा और लोग किराये पर देने के लिए ज्यादा मकान खरीदेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सरकार इन सुधारों को अपनाती है तो यह रियल एस्टेट सेक्टर और अफोर्डेबल हाउसिंग में निवेश को बढ़ावा देगा और खरीदारों के लिए मकान सस्ता और सुलभ बनेंगे।