
नई दिल्ली।
सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी की उस याचिका पर सुनवाई 21 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी है, जिसमें उन्होंने भाजपा से जुड़े मानहानि मामले को रद्द करने से इनकार करने वाले निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी है। शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले में विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है।
न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन. के. सिंह की पीठ ने यह स्पष्ट किया कि यह मामला नियमित सुनवाई वाले दिन (मंगलवार, बुधवार और गुरुवार) में ही सुना जाना चाहिए। इसी आधार पर याचिकाकर्ताओं की ओर से सुनवाई टालने का अनुरोध स्वीकार किया गया।
AAP की ओर से दलील
आम आदमी पार्टी की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने अदालत को बताया कि यह मामला संवैधानिक और कानूनी प्रश्नों से जुड़ा है, जिस पर विस्तार से बहस जरूरी है। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने दलील दी कि यह मानहानि का मामला एक राजनीतिक दल से जुड़ा है और शिकायतकर्ता को पार्टी की ओर से अधिकृत किया गया है।
निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 30 सितंबर 2024 को शिकायतकर्ता राजीव बब्बर को नोटिस जारी करते हुए निचली अदालत में चल रही कार्यवाही पर रोक लगा दी थी। अदालत ने यह अहम सवाल उठाया था कि क्या कोई राजनीतिक दल या उसका प्रतिनिधि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 199 के तहत “असंतुष्ट व्यक्ति” की श्रेणी में आता है या नहीं।
हाई कोर्ट ने याचिका की थी खारिज
इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने केजरीवाल, आतिशी, पूर्व राज्यसभा सदस्य सुशील कुमार गुप्ता और AAP नेता मनोज कुमार की याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया मानहानिकारक हैं और भाजपा की छवि धूमिल करने तथा अनुचित राजनीतिक लाभ लेने के इरादे से लगाए गए हैं।
हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि भारतीय दंड संहिता की धारा 499 (मानहानि) और 500 (दंड) के तहत मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा जारी समन आदेश में हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।
क्या है पूरा मामला
दिल्ली भाजपा की ओर से दर्ज कराई गई मानहानि शिकायत में आरोप लगाया गया है कि दिसंबर 2018 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आम आदमी पार्टी के नेताओं ने दावा किया था कि भाजपा के इशारे पर निर्वाचन आयोग ने बनिया, पूर्वांचली और मुस्लिम समुदायों के लगभग 30 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटवा दिए।
भाजपा नेता राजीव बब्बर ने इसे पार्टी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला बयान बताया और आप नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की। वहीं, केजरीवाल और अन्य आरोपियों का कहना है कि उनके खिलाफ न तो मानहानि बनती है और न ही कोई अन्य अपराध।
अब इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट 21 अप्रैल को विस्तार से सुनवाई करेगा।