Tuesday, January 27

पीड़िता और मां मुकर गईं, फिर भी पुलिस के ठोस सबूतों ने बलात्कारी को जेल भेजा; ग्वालियर कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

ग्वालियर: ग्वालियर की विशेष पॉक्सो अदालत ने पॉक्सो एक्ट के तहत एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी रिंकू वाल्मीक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसकी मां अपने बयानों से मुकर गई थीं, लेकिन पुलिस द्वारा जुटाए गए ठोस सबूतों और परिस्थितिजन्य तथ्यों ने न्यायालय को आरोपी दोषी ठहराने पर मजबूर कर दिया।

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दोषी पर अर्थदंड और सश्रम कारावास

अदालत ने आरोपी को 25,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। यदि अर्थदंड का भुगतान नहीं किया गया, तो आरोपी को एक वर्ष का सश्रम कारावास अलग से भुगतना होगा।

घटना का विवरण

यह घटना 27 मई 2025 की है। फरियादिया रेखा (परिवर्तित नाम) निवासी घाटीगांव, थाना सिरोल ने शिकायत दर्ज कराई थी। फरियादिया ने बताया कि दोपहर के समय उसकी नाबालिग बेटी और बेटा घर के बाहर खेल रहे थे। थोड़ी देर बाद बच्ची गायब हो गई। पड़ोस में रहने वाले रिंकू वाल्मीक के घर झांकने पर बच्ची उसके साथ मिली। पूछताछ पर बच्ची ने बताया कि आरोपी ने उसके साथ गलत काम किया।

पुलिस के सबूतों ने साबित किया अपराध

थाना सिरोल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया और चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसकी मां अपने बयानों से मुकर गईं, लेकिन पुलिस द्वारा संकलित ठोस साक्ष्य, परिस्थितिजन्य तथ्य और अपराध की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने रिंकू वाल्मीक को दोषी पाया।

अदालत ने प्रतिकर की राशि का निर्देश भी दिया

न्यायाधीश ने पीड़िता पर पड़े शारीरिक और मानसिक प्रभाव, भविष्य और मनोवैज्ञानिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए दूसरे प्रभावित पक्ष को प्रतिकर स्वरूप दो लाख रुपये दिलाने का निर्देश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को दिया। सजा सुनाए जाने के बाद आरोपी का सजा वारंट जारी कर उसे केंद्रीय जेल ग्वालियर भेजा गया।

न्यायपालिका की भूमिका

यह फैसला यह स्पष्ट करता है कि पॉक्सो एक्ट के तहत अपराधों में पुलिस और न्यायपालिका की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है। भले ही पीड़िता और उसकी मां अपने बयानों से मुकर गईं, लेकिन ठोस सबूतों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर न्याय सुनिश्चित किया जा सकता है।

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