Saturday, January 24

Success Story: 17 बार फेल होकर भी हार नहीं मानी, IIT के इस होनहार ने बनाई 40,000 करोड़ रुपये की कंपनी

 

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पत्थर पर लगातार पानी गिरता रहे, तो वह पत्थर कट जाता है। ठीक इसी तरह अगर कोई इंसान लगातार मेहनत करता रहे, तो सफलता उसे जरूर मिलती है। ऐसा ही उदाहरण पेश किया IIT कानपुर के ग्रेजुएट अंकुश सचदेवा ने।

 

असफलताओं से न घबराए

कंप्यूटर साइंस में डिग्री होने के बावजूद अंकुश किसी बड़ी कंपनी में शामिल नहीं हुए। इसके बजाय उन्होंने 17 लगातार असफलताओं का सामना किया। ई-कॉमर्स से लेकर यूटिलिटी सर्विस तक, हर आइडिया पर काम करने के बावजूद शुरुआती सालों में उन्हें सफलता नहीं मिली। लेकिन अंकुश ने हार नहीं मानी और एक बड़ी समस्या की ओर ध्यान दिया, जिसे टेक इंडस्ट्री अक्सर नजरअंदाज कर देती थी।

 

युरेका मोमेंट और शेयरचैट की शुरुआत

साल 2015 में अपने IIT कानपुर के दोस्तों फरीद अहसान और भानु सिंह के साथ, अंकुश ने छोटे शहरों और गांवों में इंटरनेट यूजर्स के लिए एक स्थानीय भाषा में ऐप बनाने का काम शुरू किया। मुख्यधारा के प्लेटफॉर्म्स वहां के लोगों को आकर्षित नहीं कर पा रहे थे, और उनका कंटेंट स्थानीय जरूरतों से जुड़ नहीं रहा था। यही उनका ‘युरेका मोमेंट’ था।

 

उनका स्टार्टअप ऐप शेयरचैट (ShareChat) के रूप में सामने आया। शुरुआत हिंदी में हुई, और फिर यह 15 भारतीय भाषाओं जैसे मलयालम, गुजराती, बंगाली, पंजाबी और कई अन्य में फैल गया। यह सिर्फ अंग्रेज़ी ऐप का अनुवाद नहीं था, बल्कि यह एक नया प्लेटफॉर्म था, जिसमें मजाक, स्थानीय खबरें और गैर-मेट्रो भारत की रोजमर्रा की जिंदगी शामिल थी।

 

शानदार सफलता और वैल्यूएशन

शेयरचैट ने जल्दी ही लोकप्रियता हासिल की। पंजाब के एक किसान को असम के कवि से जोड़ा, मध्य प्रदेश की गृहिणी को वायरल रेसिपी चैनल तक पहुँचाया। डिजिटल दुनिया में यह लाखों लोगों का ‘नुक्कड़’ बन गया, जो ग्लोबल इंटरनेट के लिए अदृश्य थे। साल 2021 तक इसके 1.6 करोड़ से अधिक एक्टिव यूजर्स थे। इसके बाद 2022 तक ऐप की वैल्यूएशन बढ़कर 40,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

 

प्रेरणा की कहानी

आज स्टार्टअप की दुनिया में अंकुश सचदेवा का नाम बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है। लेकिन उनकी कहानी का सबसे प्रेरणादायक हिस्सा सिर्फ 40,000 करोड़ रुपये की वैल्यूएशन नहीं है। यह 17 बार की असफलताएं हैं, जिन्होंने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया। हर ‘ना’ को ‘अभी नहीं’ समझकर उन्होंने खामोशी से मेहनत जारी रखी। उनकी कहानी हमें यही सिखाती है कि असफलताएं अंत नहीं होतीं, बल्कि सफलता की नई राह दिखाती हैं।

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