
नई दिल्ली। भारत में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रही बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने पहले सार्वजनिक भाषण में बांग्लादेश की मोहम्मद यूनुस सरकार को बेनकाब किया। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि वे यूनुस सरकार के खिलाफ उठ खड़े हों, क्योंकि यह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवाने में सक्षम नहीं है।
शेख हसीना ने अपने भाषण में कहा कि यूनुस की सरकार के सत्ता संभालने के बाद से अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़ा है, खासकर महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न और प्रताड़ना जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश में लोकतंत्र अब निर्वासन में है, मानवाधिकारों को अनदेखा किया जा रहा है और प्रेस की स्वतंत्रता खत्म कर दी गई है।
बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होने हैं। शेख हसीना ने अपने ऑडियो संदेश में बताया कि यूनुस सरकार ने अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोक रखा है। उन्होंने यूनुस को ‘भ्रष्ट, सत्ता का भूखा गद्दार’ बताते हुए उन्हें सत्ता से बेदखल करने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया।
शेख हसीना ने कहा कि मौजूदा सरकार विदेशी कठपुतली है और बांग्लादेश के बहादुर बेटे और बेटियों को संविधान की रक्षा के लिए खड़ा होना चाहिए, जिसे शहीदों ने अपने खून से लिखा था और जिसने देश को स्वतंत्र बनाया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से बांग्लादेश की वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच की भी मांग की।
पूर्व प्रधानमंत्री का यह भाषण बांग्लादेश की अवामी लीग के एक्स हैंडल पर और फॉरेन कॉरेस्पॉन्डेंट्स क्लब के कार्यक्रम ‘सेव डेमोक्रेसी इन बांग्लादेश’ में जारी किया गया।