
इस बार हजारों जेन Z ने नए साल का स्वागत नाइटक्लब की बजाय भजन क्लबिंग में किया। परिवार के साथ भक्ति गीतों पर झूमते हुए यह बदलाव जेन Z के गहरे रूचि और सोच का संकेत दे रहा है।
जेन Z में भक्ति का नया ट्रेंड
देशभर में भजन क्लबिंग का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। जेन Z न केवल बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं, बल्कि माता-पिता भी खुश हैं कि उनके बच्चे नशे में डूबने की बजाय भक्ति संगीत में लीन हैं।
भजन क्लबिंग में गायक लविश शीतल और प्रकृति शर्मा अरोड़ा जेन Z की पसंद के भजन मॉडर्न धुनों पर प्रस्तुत करते हैं। युवा अपने परिवार के साथ झूमते-गाते हैं और भक्ति संगीत का आनंद लेते हैं।
भजन क्लबिंग की लोकप्रियता
लविश और प्रकृति का कहना है कि पिछले दो वर्षों में भक्ति संगीत की मांग बढ़ी है। दोनों ने बचपन से भक्ति गीत गाए हैं और अब रॉक स्टाइल में इन्हें पेश कर रहे हैं। पहली बार हरिद्वार के एक फैमिली फंक्शन में जेन Z ने भक्ति गीतों पर झूमना शुरू किया।
भजन क्लबिंग का आइडिया जेन Z में भक्ति के प्रति बढ़ती रुचि को देखकर आया। नाइटक्लब की जगह अब ‘नाम जप’ ने ले ली है। यहां युवा नशा नहीं करते, बल्कि ईश्वर के नाम जपते हुए खुशी से नाचते-गाते हैं।
भजन क्लबिंग का फायदा
युवाओं को भक्ति से जोड़ना: रॉक स्टाइल भजन उन्हें आकर्षित करता है।
गलत राह से बचाव: नाइटक्लब का शोर और गलत संगत युवाओं को प्रभावित कर सकती है, भजन क्लबिंग मानसिक शांति देती है।
परिवारिक जुड़ाव: परिवार के साथ इवेंट में जाने से प्यार और मेलजोल बढ़ता है।
स्वस्थ गतिविधि: नाचने-गाने से फिजिकल एक्टिविटी बढ़ती है।
मानसिक शांति: ईश्वर की भक्ति तनाव कम करती है और संतुलन बनाए रखती है।
लविश और प्रकृति का कहना है कि भजन क्लबिंग जेन Z में भक्ति के प्रति रुचि और प्यार बढ़ा रही है, और उनके प्रयास रंग ला रहे हैं।