
ढाका: बांग्लादेश में सियासी और सैन्य उथल-पुथल लगातार बढ़ती जा रही है। प्रधानमंत्री शेख हसीना के पद छोड़ने और मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार बनने के बाद से देश में कई गुट उभर आए हैं। इसी बीच एक नई खींचतान सामने आई है, जो सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के बीच देखी गई।
रिपोर्ट्स के अनुसार, बांग्लादेश के सेना प्रमुख जनरल वकार उज जमां ने NSA खलीलुर्रहमान की एक बड़ी ‘सॉफ्ट तख्तापलट’ जैसी साजिश को नाकाम किया है। दावा किया जा रहा है कि रहमान ने सेना के उच्च पदों पर अपने वफादार अफसरों को नियुक्त करने की योजना बनाई थी, ताकि जमां को कमजोर किया जा सके।
NSA खलीलुर्रहमान का प्लान
अमेरिका के करीबी खलीलुर्रहमान ने नेशनल डिफेंस कॉलेज के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद शाहीनुल हक और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CGS) लेफ्टिनेंट जनरल मिजानुर रहमान शमीम के रिटायर होने का फायदा उठाया। उनका उद्देश्य था इन खाली पदों पर अपने विश्वसनीय अफसरों लेफ्टिनेंट जनरल एस.एम. कामरुल हसन और लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद फैजुर रहमान को नियुक्त कर अपनी पकड़ मजबूत करना।
जमां ने बचाई अपनी पोजीशन
जनरल वकार उज जमां ने तेजी से कार्रवाई करते हुए इन नियुक्तियों को टाल दिया और ‘सॉफ्ट तख्तापलट’ को नाकाम कर दिया। इस कदम से रहमान को बड़ा झटका लगा और जमां ने अपनी स्थिति को बनाए रखा।
हालात अभी चुनौतीपूर्ण
हालांकि साजिश असफल रही, लेकिन बांग्लादेश के रक्षा सूत्रों का कहना है कि वकार के सामने अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। खासतौर से चटगांव हिल ट्रैक्ट्स और म्यांमार-बांग्लादेश सीमा के आसपास हिंसा भड़कने का खतरा बढ़ा हुआ है। म्यांमार की जुंटा सेनाएं इस क्षेत्र में अराकान आर्मी पर हमले की योजना बना रही हैं, जिससे तनाव और बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बांग्लादेश में सेना और NSA के बीच यह रस्साकशी देश की स्थिरता के लिए गंभीर चिंता का विषय है।