
झारखंड पुलिस की मुठभेड़ में अनल दा उर्फ पतिराम मांझी, भाकपा (माओवादी) संगठन का एक कुख्यात कमांडर, ढेर हो गया। झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में सक्रिय अनल दा पर कुल 2.35 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था। वह संगठन की केंद्रीय समिति और पोलित ब्यूरो का सदस्य था और 149 से अधिक जघन्य कांडों का मुख्य सूत्रधार माना जाता था। इस मुठभेड़ में अनल दा के साथ पांच अन्य इनामी समेत कुल 15 माओवादी मारे गए।
इनामी राशि का विवरण:
झारखंड सरकार: 1 करोड़ रुपये
ओडिशा सरकार: 1.20 करोड़ रुपये
एनआईए: 15 लाख रुपये
कुल इनामी राशि: 2.35 करोड़ रुपये
अनल दा के प्रमुख और खौफनाक कांड:
- गिरिडीह शस्त्रागार लूट (2005): होमगार्ड प्रशिक्षण संस्थान पर हमला, 3 जवान और 1 नागरिक शहीद, 183 राइफलें और 2000 कारतूस लूटे गए।
- बोकारो CISF कैंप हमला (2006): 5 पुलिसकर्मी शहीद।
- कुचाई मुठभेड़ (2018): 1 पुलिसकर्मी और 1 CoBRA जवान शहीद।
- हुडंगदा पुलिस पिकेट हमला (2019): दो जवान गंभीर रूप से घायल।
- राय सिंदरी खूनी हमला (2019): 15 जवान घायल।
- कुकड़ू हाट बाजार नरसंहार (2019): 5 पुलिसकर्मी की निर्मम हत्या।
- चुनाव बहिष्कार हमला (2019): विधानसभा चुनाव दौरान हमला।
- कांटागोंडा IED ब्लास्ट (2020): रोड ऑपनिंग पार्टी को निशाना।
- लौंजी पहाड़ शहादत (2021): 3 जवान शहीद।
- महा-विस्फोटक लूट (2025): ओडिशा से 5 टन विस्फोटक सामग्री की लूट।
अनल दा का नक्सली सफर:
सक्रिय: 1987 से, गिरिडीह के पीरटांड़ थाना क्षेत्र में।
प्रभाव: झारखंड-बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में आतंक का जाल बुनना।
गिरफ्तारी: 2000 में जमुई (बिहार) में गिरफ्तार, जेल से रिहा होने के बाद फिर सक्रिय।
संगठन और रणनीति:
अनल दा सीपीआई (माओवादी) का सेंट्रल कमेटी सदस्य और संगठन का प्रमुख रणनीतिकार था। वह हथियारों की सप्लाई, कैडर मूवमेंट और बड़े हमलों की योजना बनाने में सक्रिय था। झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में उसकी भूमिका कई बड़े नक्सली हमलों में रही।
अनल दा की मौत सुरक्षा बलों के लिए नक्सलियों के खिलाफ एक महत्वपूर्ण सफलता मानी जा रही है, जिसने राज्य में माओवादी नेटवर्क को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाई।