
मेरठ: मेरठ के बहुचर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड (ब्लू ड्रम केस) की सुनवाई में गुरुवार को एक अहम मोड़ आया। जिला जज की अदालत में रिलायंस जियो इंफोकॉन लिमिटेड के अल्टरनेट नोडल अधिकारी लोकेश कुमार ने गवाही दी। उन्होंने पुलिस को उपलब्ध कराए गए तकनीकी साक्ष्यों—मोबाइल कॉल डिटेल (सीडीआर), चैटिंग हिस्ट्री और लोकेशन डेटा—के आधार पर अपना बयान अदालत में दर्ज कराया।
लोकेश कुमार ने बताया कि सभी विवरण कानूनी प्रक्रिया के तहत पुलिस को मुहैया कराए गए। इसमें शामिल थे संबंधित मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल, चैटिंग हिस्ट्री और अलग-अलग तारीखों पर फोन की लोकेशन। उन्होंने स्पष्ट किया कि किस तारीख को कौन-सा नंबर किस स्थान पर सक्रिय था, इसका रिकॉर्ड विधिवत उपलब्ध कराया गया।
जांच के दौरान सामने आया कि जिन मोबाइल नंबरों की लोकेशन ट्रेस की गई, उनमें से एक नंबर उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में सक्रिय पाया गया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह तकनीकी साक्ष्य घटना के बाद आरोपियों की गतिविधियों और उनकी आवाजाही को जोड़ने में अहम साबित हो सकता है।
घटना 3 मार्च 2025 की है, जब ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र के इंदिरा नगर में मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला पर पति सौरभ राजपूत की हत्या करने का आरोप लगा। जांच के अनुसार, हत्या के बाद शव को टुकड़ों में काटकर प्लास्टिक के नीले ड्रम में रखा गया और सीमेंट-रेत के घोल से सील कर दिया गया। 17 मार्च से दोनों आरोपी मेरठ जिला जेल में बंद हैं।
अदालत में अब तक 15 गवाहों के बयान दर्ज हो चुके हैं। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से जुड़े लोकेश कुमार का बयान केस में निर्णायक माना जा रहा है, क्योंकि यह घटना के समय-क्रम और आरोपियों की मौजूदगी को तकनीकी आधार पर स्थापित करता है।
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 30 जनवरी तय की है। माना जा रहा है कि अगली तारीख पर फोरेंसिक टीम के विशेषज्ञ अदालत में पेश होकर वैज्ञानिक साक्ष्यों की जानकारी पर अपना बयान दर्ज करवाएंगे।