
मुंबई। महाराष्ट्र में हिंदी और मराठी भाषा को लेकर जारी बहस में बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी ने अपनी राय रखी है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी भाषा को बोलने के लिए उन्हें मजबूर नहीं किया जा सकता। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वे मराठी महाराष्ट्रीयन बच्चों से भी बेहतर बोल सकते हैं।
भाषा और पहचान पर सुनील की राय
सुनील शेट्टी ने ANI से बातचीत में बताया, “मैं बहुत कम उम्र में ही मैसूर से मुंबई आया था। अपना करियर बनाने के लिए कदम उठाया, लेकिन इससे मेरी आत्म-पहचान बदलती नहीं। मैं जो भी करता हूं, उसमें मेरी मातृभूमि, मंगलुरु की झलक होती है। जब मुझसे पूछा जाता है ‘मराठी का क्या?’ तो मैं कहता हूं, भाषा किसी की पहचान का जरूरी प्रतीक क्यों बन गई?”
उन्होंने स्पष्ट कहा, “मुझे मराठी बोलने के लिए मजबूर मत करो। मैं जब चाहूंगा, तब बोलूंगा। किसी की बाध्यता में नहीं आना चाहता।”
मराठी में महाराष्ट्रीयन बच्चों से बेहतर
मुंबई को अपनी कर्मभूमि मानते हुए सुनील शेट्टी ने बताया कि मराठी सीखना उनके लिए जरूरी क्यों है। उन्होंने कहा, “अगर ये मेरी कर्मभूमि है तो भाषा सीखकर मैं बहुत से लोगों को खुश रख सकता हूं। मैं शायद आज मुंबई में रहने वाले ज्यादातर महाराष्ट्रीयन बच्चों से बेहतर मराठी बोलता हूं।”
अपकमिंग मूवी ‘वेलकम टू द जंगल’
1992 में ‘बलवान’ से बॉलीवुड में कदम रखने वाले सुनील शेट्टी 2026 में ‘वेलकम टू द जंगल’ में नजर आएंगे। यह फिल्म क्रिसमस पर रिलीज के लिए तैयार है। 2025 में उनकी पिछली फिल्म ‘केसरी वीर’ थी।
सुनील शेट्टी की यह प्रतिक्रिया भाषा विवाद में उनकी स्पष्ट और दो टूक राय के रूप में सामने आई है, जिसमें उन्होंने अपनी पहचान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को बनाए रखने पर जोर दिया।