Wednesday, January 21

सुनीता विलियम्स ने कल्पना चावला की मां और बहन से की भावुक मुलाकात, 90 वर्षीय माता ने साझा की स्मृतियां

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केरल साहित्य महोत्सव में भाग लेने भारत आईं सुनीता विलियम्स, कोलंबिया हादसे के बाद के दिनों को किया याद

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नई दिल्ली।
अंतरिक्ष की दुनिया की दो महान हस्तियों को जोड़ने वाली एक भावुक मुलाकात मंगलवार को देखने को मिली, जब प्रसिद्ध अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने दिवंगत भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की 90 वर्षीय मां संज्योति चावला और बहन दीपा चावला से मुलाकात की। यह मुलाकात स्नेह, सम्मान और पुरानी यादों से भरी रही, जिसमें एक-दूसरे को गले लगाते हुए भावनाएं साफ झलकती रहीं।

सुनीता विलियम्स इन दिनों भारत दौरे पर हैं और 22 जनवरी से शुरू हो रहे केरल साहित्य महोत्सव (KLF) के नौवें संस्करण में भाग लेने के लिए केरल पहुंची हैं। इसी क्रम में उन्होंने कल्पना चावला के परिवार से मिलकर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उनके साथ बिताए पलों को याद किया।

कोलंबिया हादसे के बाद तीन महीने तक देती रहीं सांत्वना

समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कल्पना चावला की मां संज्योति चावला ने भावुक स्वर में बताया कि 2003 में अंतरिक्ष शटल कोलंबिया दुर्घटना के बाद सुनीता विलियम्स करीब तीन महीने तक नियमित रूप से उनके घर आती थीं।
उन्होंने कहा,
“वह सुबह से शाम तक हमारे साथ रहती थीं, हमें ढाढ़स बंधाती थीं और हमारे दुख में सहभागी बनीं। उस कठिन समय में उन्होंने हमारे परिवार को बहुत सहारा दिया।”

संज्योति चावला ने यह भी बताया कि सुनीता विलियम्स और कल्पना चावला एक-दूसरे को अपने साझा पेशे—अंतरिक्ष विज्ञान—में आगे बढ़ने के लिए हमेशा प्रेरित करती थीं।

भारत आना घर लौटने जैसा लगता है: सुनीता विलियम्स

अपने संक्षिप्त संबोधन में 60 वर्षीय सुनीता विलियम्स ने कहा कि भारत आना उन्हें घर वापसी जैसा महसूस होता है, क्योंकि उनके पिता का जन्म भारत में हुआ था। उन्होंने कल्पना चावला को न केवल एक उत्कृष्ट अंतरिक्ष यात्री, बल्कि एक प्रेरणादायी इंसान बताया, जिनका सपना सीमाओं से परे था।

मानवता ही एकमात्र धर्म है’

अपनी बेटी को याद करते हुए संज्योति चावला ने गर्व और पीड़ा के मिले-जुले भावों के साथ कहा,
“कल्पना हमेशा कहा करती थी— मानवता ही एकमात्र धर्म है। जब हम उससे पूछते थे कि तुम्हारा धर्म क्या है, तो वह कहती थी— मेरा धर्म कर्म है।”

उन्होंने कहा कि कल्पना अपने साथ “अनमोल खजाना” छोड़ गई हैं—ऐसे विचार, ऐसे मूल्य और ऐसी प्रेरणा, जो आने वाली पीढ़ियों को रास्ता दिखाते रहेंगे।
“हमने उसके सपनों को पूरा करने में हमेशा उसका साथ दिया, और आज भी उस पर हमें गर्व है,” एक मां ने अपने गहरे दुख के साथ कहा।

कल्पना चावला: एक अमर प्रेरणा

गौरतलब है कि कल्पना चावला अंतरिक्ष में जाने वाली पहली भारतीय मूल की महिला थीं। फरवरी 2003 में कोलंबिया स्पेस शटल दुर्घटना में उनकी असमय मृत्यु ने पूरी दुनिया, खासकर भारत को गहरे शोक में डुबो दिया था। आज भी उनका नाम साहस, समर्पण और मानवता की मिसाल के रूप में लिया जाता है।

सुनीता विलियम्स और कल्पना चावला के परिवार की यह मुलाकात न केवल दो अंतरिक्ष यात्राओं की कहानी है, बल्कि मानवीय रिश्तों, संवेदना और साझा मूल्यों की एक भावुक झलक भी है।

 

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