
नई दिल्ली: सीबीएसई ने अपने सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों के लिए नया नियम लागू कर दिया है। अब हर सेकेंडरी और सीनियर सेकेंडरी स्कूल में काउंसलिंग और वेलनेस टीचर के साथ-साथ करियर काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य होगी। बोर्ड ने इसके लिए अपने एफिलिएशन बायलॉज 2018 में संशोधन किया है।
नए नियम का मकसद
यह कदम छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, करियर योजना और व्यक्तिगत विकास को बेहतर बनाने के लिए उठाया गया है। नए नियम के तहत छात्रों को करियर चुनने, मानसिक तनाव कम करने और इमोशनल लेवल पर खुद को संभालने में मदद मिलेगी।
स्टूडेंट–काउंसलर अनुपात और भूमिकाएं
- प्रत्येक 500 छात्रों पर एक काउंसलर की नियुक्ति अनिवार्य होगी (रिशियो 1:500)।
- दो अलग भूमिकाएं तय की गई हैं:
- काउंसलिंग और वेलनेस टीचर (सोशियो-इमोशनल काउंसलर)
- करियर काउंसलर
काउंसलिंग और वेलनेस टीचर की योग्यता
- साइकोलॉजी (क्लिनिकल/काउंसलिंग/एप्लाइड/एजुकेशनल) में ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन, या मानसिक स्वास्थ्य/काउंसलिंग में सोशल वर्क डिग्री।
- सामाजिक-भावनात्मक शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान, अभिभावक-शिक्षक संवेदनशीलता और प्राइवेसी का ज्ञान होना आवश्यक।
करियर काउंसलर की योग्यता
- ह्यूमैनिटीज, साइंस, सोशल साइंस, मैनेजमेंट, एजुकेशन या टेक्नोलॉजी में बैचलर्स/मास्टर्स डिग्री।
- करियर असेसमेंट, हायर एजुकेशन (भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर), रिसर्च स्किल्स और स्टूडेंट्स-पैरंट्स को गाइड करने की क्षमता।
प्रशिक्षण और अस्थायी नियुक्ति
- दोनों पदों पर नियुक्त व्यक्तियों को कम से कम 50 घंटे का कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम (CBP) पूरा करना होगा।
- यदि स्कूल में तुरंत योग्य करियर काउंसलर नहीं है, तो प्रशिक्षित शिक्षक को अस्थायी रूप से नॉमिनेट किया जा सकता है, लेकिन दो अकादमिक सेशन के भीतर योग्यता पूरी करनी होगी।
पहले क्या होता था?
पहले हर स्कूल में केवल एक ही काउंसलिंग और वेलनेस टीचर नियुक्त होता था। करियर काउंसलर अनिवार्य नहीं था और काउंसलर-स्टूडेंट अनुपात तय नहीं था। छोटे स्कूलों (क्लास 9-12 में 300 से कम छात्र) में पार्ट-टाइम काउंसलर की अनुमति थी।
सीबीएसई का यह नया नियम छात्रों की मानसिक, शैक्षिक और करियर संबंधी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है, जिससे उन्हें स्कूल के हर स्तर पर बेहतर मार्गदर्शन मिलेगा।