
संगीतकार ए.आर. रहमान और गायक हरिहरन के बाद अब फिल्ममेकर और कास्टिंग डायरेक्टर हनी त्रेहान ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को लेकर चौंकाने वाले दावे किए हैं। उन्होंने कहा है कि मौजूदा दौर में इंडस्ट्री के भीतर एक अदृश्य डर है, जिसके चलते रचनात्मक स्वतंत्रता लगातार सिमटती जा रही है।
एक ताज़ा इंटरव्यू में हनी त्रेहान ने बताया कि आज हालात ऐसे हो गए हैं कि बड़े बजट की फिल्मों में मुस्लिम सुपरस्टार को कास्ट तो किया जाता है, लेकिन लीड रोल हिंदू किरदार को ही दिया जाता है। उनके मुताबिक, यह बदलाव अचानक नहीं आया, बल्कि बीते कुछ वर्षों में सत्ता और पावर डायनैमिक्स के बदलने के साथ यह डर गहराता गया है।
हनी त्रेहान ने कहा,
“आज के समय में आप ‘हैदर’ या ‘उड़ता पंजाब’ जैसी फिल्में नहीं बना सकते। इंडस्ट्री में लोग डरे हुए हैं। क्रिएटिव फैसले अब कॉरपोरेट सोच और राजनीतिक अनुकूलता के हिसाब से लिए जा रहे हैं।”
सेंसर बोर्ड में डेढ़ साल से अटकी ‘पंजाब 95’
हनी त्रेहान की पीरियड इन्वेस्टिगेटिव थ्रिलर ‘पंजाब 95’ पिछले डेढ़ साल से सेंसर बोर्ड में अटकी हुई है। यह फिल्म दिवंगत मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है, जिसमें दिलजीत दोसांझ मुख्य भूमिका में हैं।
फिल्म को लेकर सेंसर बोर्ड ने 127 कट्स सुझाए हैं। इस पर हनी त्रेहान ने कहा,
“मुझे कट्स से दिक्कत नहीं है। अगर वे सही हैं, तो मैं 150 कट करने को भी तैयार हूं। लेकिन अगर यह कहा जाए कि यह हमारी राजनीति के हिसाब से ठीक नहीं बैठती, तो यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सीधा हमला है।”
‘CBFC सरकार को खुश करने की कोशिश कर रहा’
हनी त्रेहान का आरोप है कि सेंसर बोर्ड में बैठे लोग अपनी शक्ति का दुरुपयोग कर रहे हैं और कहानी को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले फिल्म सर्टिफिकेशन अपीलेट ट्रिब्यूनल (FCAT) एक रास्ता था, लेकिन 2021 में उसके खत्म होने के बाद फिल्मकारों के पास अदालत के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा।
उन्होंने सवाल उठाया,
“अगर पंजाब में कानून-व्यवस्था बिगड़ने का डर है, तो फिर ‘द कश्मीर फाइल्स’, ‘द केरल स्टोरी’, ‘इमरजेंसी’, ‘द बंगाल फाइल्स’ और ‘द साबरमती रिपोर्ट’ जैसी संवेदनशील फिल्में कैसे रिलीज़ हुईं और कई जगह टैक्स-फ्री भी रहीं?”
‘मुसलमान को विलेन दिखाता, तो तालियां मिलती’
हनी त्रेहान ने तीखा तंज कसते हुए कहा,
“शायद अगर मैंने किसी मुसलमान को विलेन दिखाया होता या उन्हें नकारात्मक रोशनी में पेश किया होता, तो मुझे भी संसद में स्टैंडिंग ओवेशन मिलता।”
उन्होंने बिना नाम लिए एक फिल्म का उदाहरण देते हुए बताया कि एक सच्ची मुस्लिम कहानी पर आधारित किरदार को डर के कारण हिंदू बना दिया गया, क्योंकि फिल्म बड़े बजट और ए-लिस्ट स्टार के साथ बनाई जा रही थी।
‘मैं किसी एजेंडे का माउथपीस नहीं’
अपने इरादों को स्पष्ट करते हुए हनी त्रेहान ने कहा,
“मैं यहां किसी पर्सनल या पॉलिटिकल एजेंडे को आगे बढ़ाने नहीं आया हूं। मैं सिर्फ कहानी सुनाना चाहता हूं। अगर मैं ईमानदार नहीं रह सकता, तो मेरे लिए फिल्म बनाना बेकार है।”
