
मुंबई: असदुद्दीन ओवैसी की अगुवाई वाली अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में शानदार प्रदर्शन कर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। मुंबई महानगरपालिका चुनाव में पार्टी ने 8 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया। गौरतलब है कि 2017 के चुनाव में एमआईएम ने केवल 2 सीटों पर ही जीत दर्ज की थी।
राज्यभर के 29 नगर निगमों में हुए चुनावों में एआईएमआईएम ने कुल 13 नगर निगमों में 126 पार्षद सीटें जीतकर अपनी ताकत का परिचय दिया। यह उपलब्धि इस बात का सबूत है कि सीमित उपस्थिति भी बड़े राजनीतिक बदलाव ला सकती है।
हैदराबाद अब भी पार्टी का संगठनात्मक केंद्र है। तेलंगाना में एआईएमआईएम के सात विधायक, दो एमएलसी और 137 नगर पार्षद हैं। इसके अलावा बिहार में पार्टी के पांच विधायक हैं। पार्टी लगातार अन्य शहरी क्षेत्रों में अपना आधार मजबूत करने के प्रयास में जुटी है।
महाराष्ट्र में, आंतरिक फेरबदल और नेतृत्व परिवर्तन के बावजूद, एआईएमआईएम की 126 पार्षद सीटें शरद पवार की एनसीपी से लगभग तीन गुना अधिक हैं। वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के मुकाबले यह लगभग 30 सीटों से पीछे है। 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पार्टी ने मालेगांव सेंट्रल सीट भी जीती, जिससे अल्पसंख्यक बहुल शहरी क्षेत्रों पर उसका प्रभाव और मजबूत हुआ है।
दिल्ली और यूपी में भी बढ़ा प्रभाव
दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में AIMIM अपना खाता नहीं खोल पाई, लेकिन मुस्तफाबाद क्षेत्र में 33,474 वोट हासिल कर विपक्षी दलों के बीच वोट बंटवारे में निर्णायक भूमिका निभाई। उत्तर प्रदेश के 2022 विधानसभा चुनावों में भी पार्टी ने चुनिंदा क्षेत्रों में अपना प्रभाव दिखाया, जहां उसका वोट शेयर भाजपा की जीत के अंतर से अधिक था।
विश्लेषकों का कहना है कि एआईएमआईएम का प्रभाव, चाहे वह जीत न भी पाये, चुनावी समीकरणों को बदलने की क्षमता रखता है। यह विपक्षी दलों की रणनीतियों को चुनौती देता है और दोनों पक्षों में राजनीतिक एवं धार्मिक संवाद को प्रभावित करता है।
ओवैसी: पार्टी के नेतृत्व और लोकप्रिय चेहरा
एआईएमआईएम का विस्तार असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व में हुआ है। उनकी प्रभावशाली भाषण शैली और संसदीय दक्षता ने उन्हें कांग्रेस के बाहर सबसे प्रमुख मुस्लिम नेता बना दिया है। शहरी और अर्ध-शहरी मतदाताओं, विशेष रूप से सीमित औपचारिक शिक्षा वाले वर्गों में उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।
संसद में ओवैसी नियमित रूप से अल्पसंख्यक अधिकारों, नागरिकता कानून और शहरी शासन जैसे मुद्दों पर भाजपा और कांग्रेस दोनों को निशाना बनाते हैं। अंतरराष्ट्रीय संसदीय संपर्क और ऑपरेशन सिंदूर के बाद उनका राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव और बढ़ गया है। बढ़ते प्रभाव के साथ, AIMIM अब केवल हैदराबाद तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश में चुनावी और राजनीतिक बहसों को प्रभावित करने वाली शक्ति बन चुकी है।