
नई दिल्ली: संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान आज भारत की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है जब पश्चिम एशिया में ईरान-अमेरिका संबंध तनावपूर्ण हैं, यमन को लेकर सऊदी अरब और यूएई के बीच तनाव बढ़ा है, और गाजा क्षेत्र में राजनीतिक अस्थिरता है। ऐसे में भारत-UAE की रणनीतिक जुगलबंदी पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।
तीसरी राष्ट्रपति यात्रा, पांचवीं कुल यात्रा:
नाहयान की बतौर राष्ट्रपति यह भारत की तीसरी और पिछले एक दशक में पांचवीं यात्रा है। यूएई के भारतीय दूतावास के अनुसार, यह दौरा भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी को नए आयाम देने का अवसर है। दोनों नेता, राष्ट्रपति नाहयान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, इस दौरान नई आर्थिक और रणनीतिक राहें तलाशेंगे।
यूएई राष्ट्रपति की भारत यात्रा का महत्व:
यूएई राष्ट्रपति का यह दौरा राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक क्षेत्रों में दोनों देशों के घनिष्ठ रिश्तों का प्रतीक है। भारत और यूएई शीर्ष व्यापार और निवेश भागीदार हैं, जिन्हें व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA), स्थानीय मुद्रा निपटान (LCS) प्रणाली, और द्विपक्षीय निवेश संधियों के माध्यम से बढ़ावा मिला है। ऊर्जा क्षेत्र में दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते भी दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाते हैं।
भारत-यूएई रिश्तों की मजबूती:
पिछले पांच वर्षों में दोनों देशों के रिश्ते काफी प्रगाढ़ हुए हैं। सितंबर 2024 में अबू धाबी में क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, अप्रैल 2025 में उप प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम की भारत यात्राएं इसी मजबूती की मिसाल हैं। जनवरी 2024 में नाहयान गुजरात में वाइब्रेंट गुजरात ग्लोबल समिट के मुख्य अतिथि भी रहे।
यूएई राष्ट्रपति का यह दौरा क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर आपसी विचारों के आदान-प्रदान का अवसर भी प्रदान करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे से दोनों देशों के बीच निवेश, व्यापार और ऊर्जा साझेदारी में नए अरबों डॉलर के सौदे होने की संभावना है, जो विरोधी ताकतों को चौंका सकते हैं।