Monday, January 19

प्रयागराज: शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अन्न-जल का त्याग कर धरना शुरू किया, आगे की रणनीति करेंगे घोषित

प्रयागराज, 19 जनवरी 2026: माघ मेला के मौनी अमावस्या महास्नान के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती संगम स्नान से वंचित रहने के विरोध में धरने पर बैठ गए। रविवार की घटना के बाद से ही उन्होंने अन्न-जल का त्याग कर दिया है और सोमवार दोपहर 12 बजे अपनी आगे की रणनीति का खुलासा करेंगे।

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पालकी रोकने पर विवाद

मौनी अमावस्या के दिन शंकराचार्य पालकी पर सवार होकर संगम स्नान करने जा रहे थे, लेकिन मेला प्रबंधन और पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस पर उनके अनुयायियों ने विरोध शुरू कर दिया और करीब तीन घंटे तक संगम तट पर धक्का-मुक्की और हंगामा चलता रहा। बावजूद इसके प्रशासन ने पालकी आगे नहीं बढ़ाने दिया, और शंकराचार्य बिना स्नान किए वापस लौट गए।

शंकराचार्य का बयान

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया से कहा, “हम पिछले 40 सालों से संगम स्नान के लिए आते रहे हैं। शंकराचार्य बनने के बाद पिछले तीन वर्षों से पालकी पर आते हैं ताकि श्रद्धालु दूर से दर्शन कर सकें और भगदड़ न हो। पुलिस और प्रशासन हमें पैदल कर नीचा दिखाना चाहता है।” उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उन्हें अपमानित करने और भगदड़ कराने की साजिश रची।

पुलिस और प्रशासन का रुख

प्रयागराज पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार ने कहा कि शंकराचार्य 200 अनुयायियों के साथ संगम पर जाने का प्रयास कर रहे थे। प्रशासन ने सुझाव दिया कि वे 20 अनुयायियों के साथ पैदल स्नान करें, लेकिन उनका समर्थन करने वाले अनुयायियों ने पुलिस के साथ धक्का-मुक्की की। पुलिस ने केवल कुछ अनुयायियों को हटाया, क्योंकि संत होने के कारण उनके साथ बल प्रयोग नहीं किया जा सका।

मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल और मेलाधिकारी ऋषिराज भी मौके पर पहुंचे, लेकिन शंकराचार्य ने पैदल स्नान करने से इंकार कर दिया। पुलिस ने कहा कि माघ मेले में नई परंपरा शुरू नहीं होगी और घटना के वीडियो के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के धरने और अन्न-जल त्याग ने माघ मेला में सनसनी फैला दी है। अब सबकी नजरें सोमवार दोपहर उनके द्वारा घोषित रणनीति पर लगी हैं।

 

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