
नई दिल्ली।
“भाई देख पोर्शे!”, “नई बेंटले देखी क्या?”—ऐसी बातें आपने अक्सर लड़कों के मुंह से सुनी होंगी। सुपर लग्जरी और पावरफुल कारों को लेकर पुरुषों का जुनून किसी एक वर्ग या आमदनी तक सीमित नहीं है। सैलरी चाहे 15 हजार हो या 15 लाख, महंगी कारों का आकर्षण लगभग हर उम्र और वर्ग के लड़कों में देखने को मिलता है। आखिर ऐसा क्यों है? इसका जवाब सिर्फ शौक या दिखावे में नहीं, बल्कि साइंस, समाज और मनोविज्ञान के गहरे रिश्ते में छिपा है।
उच्च ‘मेट वैल्यू’ का संकेत
कई शोध बताते हैं कि जिन पुरुषों के पास लग्जरी या प्रीमियम कारें होती हैं, उन्हें सामाजिक रूप से अधिक आकर्षक और योग्य साथी माना जाता है। इसे ‘हाई मेट वैल्यू’ कहा जाता है। यानी महंगी कार एक तरह से यह संकेत देती है कि व्यक्ति संसाधन-संपन्न और सक्षम है।
दूसरे पुरुषों से प्रतिस्पर्धा
रिसर्च के अनुसार, पुरुषों में आपसी प्रतिस्पर्धा एक बड़ी वजह है। लग्जरी कारें उनके लिए खुद को दूसरे पुरुषों से बेहतर, सफल और ऊंचे दर्जे का दिखाने का माध्यम बन जाती हैं। यह प्रतिस्पर्धा सीधे तौर पर स्टेटस और पहचान से जुड़ी होती है।
टेस्टोस्टेरोन का असर
वैज्ञानिक अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि जिन पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर अधिक होता है, वे स्टेटस सिम्बल वाली चीजों—जैसे महंगी कारें—की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं। यह हार्मोन जोखिम लेने, ताकत दिखाने और प्रभुत्व की भावना से जुड़ा माना जाता है।
पहचान और पर्सनैलिटी का हिस्सा
अक्सर पुरुष अपनी कार को सिर्फ एक वाहन नहीं, बल्कि अपनी पहचान का हिस्सा मानते हैं। लग्जरी कार उनके लिए उनकी पर्सनैलिटी और लाइफस्टाइल का विस्तार होती है, जिसके जरिए वे खुद को समाज के सामने पेश करते हैं।
ताकत और कंट्रोल का अनुभव
मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि पावरफुल और महंगी कारें चलाने से व्यक्ति को ताकत, नियंत्रण और आत्मविश्वास का एहसास होता है। यह ‘साइकोलॉजिकल ओनरशिप’ का भाव है, जो इंसान को अंदर से मजबूत महसूस कराता है।
समृद्धि और एलीट स्टेटस का प्रदर्शन
पोर्शे, बेंटले, मैसेराटी जैसे ब्रांड समाज में संपन्नता और सफलता के प्रतीक माने जाते हैं। पुरुष इन ब्रांड्स से खुद को जोड़कर अपनी आर्थिक स्थिति और सामाजिक रुतबे को दिखाने की कोशिश करते हैं।
सफलता का प्रतीक
लग्जरी कारों को लंबे समय से सफलता और उपलब्धि से जोड़ा जाता रहा है। यही वजह है कि कई पुरुष इन्हें अपने सपनों का हिस्सा बनाते हैं और मानते हैं कि एक दिन ऐसी कार खरीदना उनकी कामयाबी की मुहर होगी।
कुल मिलाकर, महंगी कारों के प्रति पुरुषों का आकर्षण सिर्फ दिखावे का नहीं, बल्कि जैविक प्रवृत्तियों, सामाजिक प्रतिस्पर्धा और मनोवैज्ञानिक जरूरतों का मिला-जुला परिणाम है। शायद यही कारण है कि आमदनी कुछ भी हो, कारों को लेकर लड़कों का क्रेज कभी कम नहीं होता।