Saturday, January 17

खरगोन में डिजिटल ठगी का नया मामला: 80 साल के प्रोफेसर से 10 लाख रुपये की ठगी, बैंक अधिकारियों ने बचाई बाकी जमा पूंजी

 

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खरगोन/सनावद: साइबर ठगों ने सनावद में 80 वर्षीय रिटायर्ड प्रोफेसर शशिकांत कुलकर्णी को डिजिटल अरेस्ट के डर में दो दिन तक फंसाकर 10 लाख रुपये ठग लिए। साइबर ठगी के इस मामले ने स्थानीय प्रशासन और आम लोगों की नींद उड़ा दी।

 

जानकारी के अनुसार, प्रोफेसर शशिकांत कुलकर्णी, जो पॉलिटेक्निक कॉलेज के मैकेनिकल विभाग के पूर्व इंचार्ज रहे हैं, को 9 जनवरी को व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को ‘अमर सिंह’ बताते हुए NIA अधिकारी बताया और दावा किया कि दिल्ली में पकड़े गए आतंकियों के खातों से कुलकर्णी के खाते में करोड़ों रुपये ट्रांसफर हुए हैं। प्रोफेसर को आतंकवाद से जोड़ा गया और दिल्ली में पूछताछ के लिए बुलाया गया।

 

स्वास्थ्य और उम्र के कारण दिल्ली न जा पाने पर कॉल करने वालों ने मामला ‘सेटल’ करने के नाम पर अन्य खाते में 10 लाख रुपये RTGS करने को कहा। लगातार धमकी और डिजिटल अरेस्ट जैसी स्थिति से मानसिक दबाव में आकर प्रोफेसर ने 11 जनवरी को 10 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।

 

पीड़ित ने बताया कि ठगी के बाद भी आरोपी लगातार व्हाट्सएप कॉल कर रहे थे और खाते को फ्रीज न कराने के बदले और रकम की मांग कर रहे थे। समय रहते बैंक अधिकारियों की सतर्कता से प्रोफेसर की बाकी जमा पूंजी बच गई।

 

खरगोन की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शकुंतला रूहल ने बताया कि प्रोफेसर ने अपने पुत्र के कहने पर 15 जनवरी को साइबर सेल और स्थानीय पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। जांच में स्पष्ट हुआ कि कुलकर्णी के नाम से कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं है और न ही दिल्ली में ऐसा कोई आतंकवादी मामला दर्ज है।

 

पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी डिजिटल अरेस्ट, गिरफ्तारी वारंट या जांच एजेंसी के नाम पर आने वाली कॉल पर विश्वास न करें। किसी भी संदिग्ध कॉल की सूचना तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस को दें।

 

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