Friday, January 16

बिहार में कांग्रेस का ‘वजूद’ संकट में: क्या पश्चिम बंगाल की राह पर चलेगी पार्टी?

 

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पटना: मकर संक्रांति के बाद खरमास समाप्त हो चुका है और अब सभी की नजरें कांग्रेस के छह विधायकों पर लगी हैं कि वे कब पाला बदलते हैं। हालांकि पार्टी की ओर से सभी विधायकों के एकजुट रहने का दावा किया जा रहा है, लेकिन हालिया घटनाक्रम—बैठक से दूरी और पारंपरिक ‘दही-चूड़ा’ भोज में गैरहाजिरी—कुछ और ही संकेत दे रहे हैं।

 

सत्ताधारी दलों की नज़रों में कांग्रेस:

सूत्रों के अनुसार, जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) के नेता कांग्रेस के छह विधायकों के संपर्क में हैं और जल्द ही उनका एनडीए में शामिल होने का दावा किया जा रहा है। लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के नेता संजय कुमार ने भी पुष्टि की कि कांग्रेस के सभी छह विधायक सत्तारूढ़ गठबंधन के संपर्क में हैं।

 

कांग्रेस का खंडन और असली स्थिति:

कांग्रेस नेता राजेश राम ने अफवाहों का खंडन किया है, लेकिन पार्टी कार्यक्रमों में विधायकों की गैरमौजूदगी और एनडीए के दावों ने संकेत दे दिया है कि महागठबंधन पहले से ही कमजोर कांग्रेस के लिए नया संकट बन सकता है।

 

तीन संभावित राजनीतिक समीकरण:

 

  1. अगर सभी छह विधायक पाला बदलते हैं, तो बिहार विधानसभा में कांग्रेस का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा।
  2. यदि दो-तिहाई विधायक अलग होते हैं, तो दलबदल विरोधी कानून के तहत एक नया गुट बन सकता है, जिससे कांग्रेस और कमजोर होगी।
  3. अगर सभी विधायक पार्टी में बने रहते हैं, तब भी लगातार उठ रही दलबदल की अटकलें कांग्रेस की साख को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं।

 

नतीजा:

कांग्रेस के भीतर संभावित टूट की आशंका पहले से ही कमजोर महागठबंधन को और भी कमजोर कर सकती है। बिहार की राजनीति में इस घटनाक्रम का असर गंभीर रूप से देखा जा रहा है।

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