
सना।
यमन में राजनीतिक उथल-पुथल फिर बढ़ गई है। गुरुवार को प्रधानमंत्री सलेम बिन ब्राइक ने इस्तीफा दे दिया, जिसे सऊदी समर्थित प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (PLC) ने मंजूर कर लिया। उनके इस्तीफे के बाद विदेश मंत्री शाय्या मोहसिन जिंदानी को नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया और उन्हें अगली सरकार बनाने का जिम्मा सौंपा गया।
सलेम बिन ब्राइक का इस्तीफा राजनीतिक और सुरक्षा तनाव के बीच आया है। PLC ने इसी दिन पूर्व रक्षा मंत्री अल-सुबैही और हद्रामौत के गवर्नर सलेम अल-खानबाशी को भी नियुक्त किया, जिन्होंने सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) से संबंधों के चलते बर्खास्त किए गए सदस्यों की जगह ली।
यमन में हिंसा और संघर्ष का दशक
यमन 2014 से संघर्ष में फंसा हुआ है, जब ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने राजधानी सना समेत उत्तरी इलाकों पर कब्जा किया। अदन समेत बाकी हिस्सों पर सऊदी समर्थित PLC का नियंत्रण है।
सऊदी अरब और UAE के बीच तनाव
हाल के महीनों में सऊदी अरब और UAE के बीच बढ़ते तनाव ने स्थिति को और जटिल बना दिया। दिसंबर में UAE समर्थित सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) ने दक्षिणी और पूर्वी यमन के इलाकों पर नियंत्रण कर लिया, जिससे सऊदी सीमा के पास सुरक्षा खतरा पैदा हुआ।
- सऊदी अरब ने सेना जमा कर STC को पीछे हटने की चेतावनी दी।
- 30 दिसंबर को सऊदी जेट्स ने मुकल्ला बंदरगाह पर बमबारी की और हथियारों की खेप को निशाना बनाया, जिसे UAE ने STC को भेजने का आरोप लगाया।
- UAE ने आरोपों से इनकार किया और अपनी सेना वापस बुलाने की घोषणा की।
यमन में यह राजनीतिक बदलाव और बाहरी हस्तक्षेप यह दर्शाता है कि खाड़ी देशों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा और विवाद, देश में स्थिरता के प्रयासों को लगातार चुनौती दे रहे हैं।