Tuesday, January 13

शक्सगाम घाटी: पाकिस्तान का अवैध ‘तोहफा’, जिसे चीन भारत के लिए बना रहा नासूरअंजन

शक्सगाम घाटी में जो कुछ हो रहा है, उसके पीछे चीन का भारत के साथ किया गया ऐतिहासिक धोखा है, जो अब भारत के लिए गंभीर नासूर बन चुका है। यह विवाद पाकिस्तान की मंशा और चीन के विस्तारवादी कदमों से गहराता जा रहा है। पाकिस्तान ने वह जमीन चीन को सौंप दी, जिस पर उसका कोई अधिकार नहीं था, और चीन इसे अपने नियंत्रण में लेकर भारत की संप्रभुता को चुनौती दे रहा है।

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चीन का अवैध दावा
चीन का कहना है कि शक्सगाम घाटी उसकी है, क्योंकि 1963 में पाकिस्तान के साथ हुए ‘चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते’ के तहत यह क्षेत्र उसे मिला। चीन इस आधार पर इलाके में इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण कर रहा है और इसे अपनी सीमा का हिस्सा बता रहा है। लेकिन ऐतिहासिक और कानूनी दृष्टि से यह दावा पूरी तरह अवैध है। शक्सगाम घाटी पर पाकिस्तान का कोई वैधानिक अधिकार नहीं था, फिर उसने इसे चीन को सौंप कैसे दिया?

भौगोलिक स्थिति और भारत का दावा
शक्सगाम घाटी, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के हुनजा-गिलगित क्षेत्र में स्थित है। यह काराकोरम रेंज की ऊंचाई पर लगभग 20,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। उत्तर में चीन (तिब्बत) का झिंजियांग प्रांत, पूर्व में सियाचिन ग्लेशियर और दक्षिण-पश्चिम में पीओके का अन्य क्षेत्र है। इस हिसाब से कानूनी रूप से यह भारत का हिस्सा है। पाकिस्तान ने 1948 में इस पर अवैध कब्जा किया और 1963 में इसे चीन को सौंप दिया।

1963 का समझौता
1963 में पाकिस्तान और चीन के बीच सीमा विवाद सुलझाने के लिए समझौता हुआ, जिसे चीन-पाकिस्तान सीमा समझौता, 1963 कहा जाता है। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि कश्मीर विवाद हल होने के बाद संबंधित संप्रभु राष्ट्र भारत और पाकिस्तान, चीन के साथ सीमा पर औपचारिक संधि पर बातचीत करेंगे। इसका मतलब यह है कि पाकिस्तान के पास शक्सगाम घाटी को चीन को देने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था।

भारत का स्पष्ट रुख
भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा है, “चीन और पाकिस्तान का जो जॉइंट स्टेटमेंट है, वह अवैध है। हम वहां किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं करते। चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर का यह हिस्सा हमारे लिए गैर-कानूनी है।”

चीन का विस्तारवादी मंसूबा
1970 के दशक में चीन और पाकिस्तान ने मिलकर काराकोरम हाईवे का निर्माण शुरू किया। अब चीन इस पर अपना अधिकार जताकर और सख्त रुख अपनाकर क्षेत्र को अपने कब्जे में रखना चाहता है, जबकि समझौते की शर्तें ही उसके दावे को कमजोर करती हैं।

निष्कर्ष
भारत का स्पष्ट मत है कि शक्सगाम घाटी अभी चीन के अवैध नियंत्रण में है, लेकिन यह घाटी भारत का अभिन्न अंग है। जैसे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, वैसे ही शक्सगाम घाटी भी भारत का हिस्सा है और इसके लिए भारत किसी भी स्थिति में अपने कानूनी और संवैधानिक अधिकार से पीछे नहीं हटेगा।

 

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